आगरा में नगर निगम के खिलाफ अनोखा विरोध: बदहाल सुविधाओं से तंग आकर वार्ड-47 के निवासियों ने घरों पर लगाए ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर

स्थानीय समाचार

आगरा। आगरा नगर निगम के वार्ड-47 (सेक्टर-6) में विकास कार्यों के दावों की पोल खुल गई है। लंबे समय से बदहाल सड़क, सीवर, जल निकासी और सफाई व्यवस्था से उपजी जन-नाराजगी मंगलवार को सड़क पर उतर आई। समस्याओं से त्रस्त निवासियों ने अपने घरों के बाहर “यह मकान बिकाऊ है” के पोस्टर चस्पा कर प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।

नारकीय स्थिति में रहने को मजबूर हैं लोग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाका कई वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। सड़कों की स्थिति जर्जर हो चुकी है और जगह-जगह बने गहरे गड्ढे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। सीवर लाइनें चोक होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है।

निवासियों के अनुसार, बरसात के दिनों में यह स्थिति और भी अधिक भयावह हो जाती है, जिससे जलभराव के साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है और संक्रमण का खतरा बना रहता है।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों से तंग जनता

स्थानीय निवासी राधा ने बताया कि समस्याओं के समाधान को लेकर नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से अनगिनत बार गुहार लगाई गई है, लेकिन हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं।

उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि लंबे समय से की जा रही मंदिर की बाउंड्री वॉल निर्माण की मांग को भी अनदेखा किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्रीय पार्षद भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं और शिकायतों के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया है।

​व्यवस्था पर गहराते सवाल

यह विरोध केवल कुछ पोस्टरों तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। निवासियों का मानना है कि जब किसी नागरिक को अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए अपना आशियाना बेचने की बात सार्वजनिक करनी पड़े, तो यह स्पष्ट संकेत है कि शिकायत निवारण प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।

​तत्काल समाधान की मांग

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क, सीवर और सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो उन्हें मजबूरन अपना क्षेत्र छोड़कर कहीं और जाना पड़ेगा। फिलहाल, वार्ड-47 के लोगों का यह विरोध पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन इस विरोध को गंभीरता से लेता है या फिर निवासियों की यह पीड़ा भी केवल आश्वासनों की भेंट चढ़ जाएगी।

Dr. Bhanu Pratap Singh