इस्लामाबाद। पाकिस्तान में इस्लामाबाद से 100 किमी दक्षिण-पश्चिम में गाह नाम का गांव स्थित है। इस गांव में भी शोक मनाया जा रहा है। शुक्रवार की नमाज अदा करने के बाद गांव के निवासी पाकिस्तानी नेता राजा मोहम्मद अली के घर पर भारत के पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के निधन का शोक व्यक्त करने के लिए इकट्ठा हुए। शोक सभा में हिस्सा लेने वाले लोगों ने डॉ. सिंह को गांव का एक प्रमुख व्यक्ति बताया। यहां मिली रिपोर्ट के मुताबिक गांव के निवासी राजा आशिक अली ने कहा कि आज हमने गांव का मुखिया खो दिया।
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म भारत विभाजन से पहले पाकिस्तान के इलाके में हुआ था। उनका जन्म आज के पाकिस्तान के चकवाल जिले के गाह गांव में 26 सितंबर 1932 को हुआ था। उनकी पत्नी गुरशरण कौर कोहली का पैतृक गांव धक्कू भी चकवाल जिले में है। हालांकि धक्कू गांव में गुरशरण को कोई नहीं जानता, क्योंकि 1947 के विभाजन के दौरान वह सिर्फ 10 साल की थीं। जब 2004 में मनमोहन सिंह पीएम बने तो धक्कू और गाह दोनों गांव चर्चा में आ गए।
गांव के लोगों को उम्मीद थी कि मनमोहन सिंह और गुरशरण कौर चकवाल आएंगे। धक्कू गांव की महिलाओं ने खजूर और सरकंडे की पत्तियों से बनी ट्रे तैयार करना शुरू कर दिया था, ताकि मेहमानों को उपहार में दिया जा सके। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 2008 में मनमोहन सिंह के सहपाठी राजा मोहम्मद अली दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने अपने दोस्त और कौर से मुलाकात की। राजा अली ने किसी तरह यात्रा के लिए धन की व्यवस्था की। लेकिन गाह के अन्य छह सहपाठी पैसों की कमी के कारण दिल्ली नहीं आ सके।
दोनों दोस्तों ने मुलाकात के दौरान एक दूसरे को उपहार दिए। बाद में अली का निधन हो गया। लेकिन उनके भतीजे राजा आशिक अली ने सिंह की यात्रा की प्रतीक्षा जारी रखी। शुक्रवार को आयोजित सभा में राजा आशिक अली ने याद किया कि 2004 में डॉ. सिंह के 12 दोस्त जीवित थे। उन्होंने बताया कि डॉ. सिंह के पीएम बनने को लेकर गांववाले बेहद खुश थे। उन्होंने कहा, ‘डॉ. साहब के पीएम बनने के बाद हमने गाह में सड़क, स्कूल और सोलर लाइट की सुविधाएं देखी।’
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