दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को पार्टी को उस समय एक और बड़ा सियासी झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस छोड़कर तृणमूल का दामन थामने वालीं सुष्मिता देव ने दिल्ली में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से भेंट की और उन्हें अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया।
यह इस्तीफा तृणमूल खेमे में मचे घमासान को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि इस सप्ताह तृणमूल से इस्तीफा देने वालीं वे दूसरी सांसद हैं। सुष्मिता देव से पहले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर राय ने भी पार्टी और संसद की सदस्यता को अलविदा कह दिया था।
सियासी गलियारों में अब इस बात की चर्चा जोर-शोर से है कि सुष्मिता देव जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हिस्सा बन सकती हैं। सूत्रों की मानें तो उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के साथ हुई मुलाकात ने इन अटकलों को और अधिक बल दे दिया है।
इस्तीफे में व्यक्त किया आभार
अपने इस्तीफे के औपचारिक पत्र में सुष्मिता देव ने स्पष्ट शब्दों में लिखा, “मैं राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे रही हूं, जिसे कृपया अविलंब स्वीकार करने की कृपा करें।” उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग को याद करते हुए सभापति, उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय के तमाम अधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
तृणमूल में बढ़ता ‘बागी’ सिलसिला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस आंतरिक बगावत से जूझ रही है। पार्टी के भीतर असंतोष का आलम यह है कि कई सांसद अब एक अलग धड़ा तैयार कर सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जुड़ने की राह पर चल पड़े हैं।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल के 80 विधायकों में से एक बड़े वर्ग ने रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में अपना अलग समूह बना लिया है। इतना ही नहीं, रिताब्रता बनर्जी को राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता भी नियुक्त कर दिया गया है, जो तृणमूल सुप्रीमो के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
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