दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य में पार्टी के भीतर जारी बिखराव के बीच, अब दिल्ली की सत्ता के गलियारों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है।
टीएमसी के संसदीय दल में अब तक की सबसे बड़ी टूट की पुष्टि हो गई है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकते हुए संसद में अपनी अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया है। इस बगावती समूह में जादवपुर की सांसद और लोकप्रिय अभिनेत्री सयानी घोष का नाम शामिल होना पार्टी नेतृत्व के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।
लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा पत्र
राजनीतिक सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के इन 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। इस संयुक्त पत्र में सांसदों ने संसद के भीतर उनके बैठने की व्यवस्था को अलग करने का आग्रह किया है। इसके अतिरिक्त, इन सांसदों ने केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को अपना समर्थन देने का बड़ा ऐलान कर दिया है।
बताया जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण पत्र पर जादवपुर सांसद सयानी घोष के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए इसे राष्ट्रीय राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा और करारा झटका माना जा रहा है।
विवादों से पुराना नाता और सयानी का सियासी सफर
सयानी घोष पश्चिम बंगाल की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका रही हैं, जो वर्तमान में जादवपुर संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व कर रही हैं। बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान उनका एक गाना ‘मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीना’ खासा सुर्खियों में रहा था। उस दौरान इस गाने को लेकर तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था।
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे आधार बनाकर ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टीकरण के गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन आज की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों ने सबको हैरान कर दिया है, क्योंकि वही सयानी घोष अब भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पाले में खड़ी नजर आ रही हैं।
राघव चड्ढा पर दिए बयान की हो रही चर्चा
अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर सयानी घोष का पुराना बयान भी अब चर्चा का विषय बन गया है। चुनावी जनसभा के दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेता राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा था, “मैं चड्ढा नहीं हूं जो ‘चड्डी’ बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा।”
उनके इस बयान पर भाजपा नेताओं ने उस समय कड़ी आपत्ति जताई थी। हालाँकि, समय का चक्र देखिए कि आज सयानी घोष खुद उसी खेमे का हिस्सा बन गई हैं, जिसके खिलाफ वे कभी तीखे तेवर अपनाती थीं। इस घटनाक्रम ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक की सियासत को पूरी तरह हिला कर रख दिया है।
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