सफलता की चमक के पीछे का ‘अनदेखा’ सच: एल.सी. सिंह की पुस्तक ‘थिंग्स वी डोंट सी’ का मुंबई में भव्य विमोचन

PRESS RELEASE

​मुंबई (अनिल बेदाग): सपनों की नगरी मुंबई में एक ऐसी शाम सजी जहाँ व्यापारिक रणनीतियों की जगह भावनाओं ने ले ली। जाने-माने बिजनेस लीडर और लेखक एल.सी. सिंह के संस्मरण (Memoir) ‘थिंग्स वी डोंट सी’ (Things We Don’t See) का विमोचन केवल एक किताबी आयोजन नहीं, बल्कि जीवन की उस अंतहीन यात्रा का उत्सव बन गया जिसे हम अक्सर भागदौड़ में पीछे छोड़ देते हैं। यह पुस्तक उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि एक आत्मा की वह ईमानदारी भरी पुकार है जो पाठक को स्वयं के भीतर झांकने पर मजबूर कर देती है।

बोर्ड रूम से लेकर बचपन की गलियों तक का सफर

विमोचन के दौरान जब एल.सी. सिंह ने अपनी पुस्तक के अंश साझा किए, तो वहाँ मौजूद श्रोताओं को एक ऐसे इंसान की झलक मिली जिसने वैश्विक स्तर के बोर्डरूम से लेकर बचपन के संघर्षों तक को बेहद संजीदगी से जिया है। किताब में बचपन की जिज्ञासा, असफलताओं से मिली अमूल्य सीख और सफलता के शिखर तक पहुँचने के मानवीय पहलुओं को बड़ी ही खूबसूरती और पारदर्शिता के साथ पिरोया गया है।

​रिश्तों और कृतज्ञता का जीवंत संगम

​इस लॉन्च की भावनात्मक गहराई तब और बढ़ गई जब भारतीय आईटी जगत के पितामह स्वर्गीय एफ.सी. कोहली की स्मृतियों का प्रतिनिधित्व करने वालीं श्रीमती स्वर्ण कोहली ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। लेखक के भाई उदयचंद्र सिंह और पुत्री स्वाति की मौजूदगी ने इस आयोजन को एक पारिवारिक मिलन और पुरानी यादों के उत्सव में बदल दिया। यह समागम रिश्तों और कृतज्ञता की एक ऐसी मिसाल बना जिसने हर किसी के दिल को छू लिया।

क्या है ‘थिंग्स वी डोंट सी’ का संदेश?

​यह संस्मरण पाठकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करता है क्या सफलता केवल वही है जो दुनिया को दिखाई देती है? या फिर इसके पीछे कोई गहरा, अनकहा और अदृश्य सच भी छिपा होता है? एल.सी. सिंह ने अपने आत्मनिरीक्षण (Self-introspection) के जरिए एक ऐसा दर्पण पेश किया है जिसमें हर व्यक्ति अपनी छवि देख सकता है।

​यह किताब केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की उन परतों को महसूस करने के लिए है जिन्हें अक्सर ‘अनदेखा’ कर दिया जाता है।

Dr. Bhanu Pratap Singh