डॉ भानु प्रताप सिंह
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. आज जब सूरज की किरणें धरती पर करुणा का प्रकाश बिखेर रही थीं, तब मानवता की एक ऐसी तस्वीर उभरी, जो हृदय को झकझोर देने के साथ-साथ आशा का संचार भी करती है। यह पवित्र धरती, जहाँ भगवान महावीर की जयंती का तृतीय दिवस मनाया जा रहा है, वहाँ एक ओर दिव्यांगों की पीड़ा अपनी करुण कथा कह रही है, तो दूसरी ओर सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम उनकी जिंदगी में नया उजाला ला रहा है।
पानी का अभिशाप और पीड़ा की कहानी
पचगई खेड़ा, एक ऐसा गाँव जहाँ पानी की हर बूँद जीवन देने के बजाय अभिशाप बन गई है। यहाँ फ्लोराइड से दूषित जल ने मासूम बच्चों के सपनों को कुचल दिया है। जन्म से ही टेढ़े पैरों के साथ जीवन की राह पर चलने को मजबूर ये नन्हे दिल, और उनके माता-पिता की आँखों में छिपी वह पीड़ा, जो शब्दों से परे है। हर घर में दिव्यांगता का साया मँडराता है, जहाँ माँ की गोद में खेलने वाला बच्चा सहारे की आस लिए बड़ा होता है। रोजगार की कमी और समाज की उपेक्षा ने इनकी तकलीफों को और गहरा कर दिया है। यहाँ की हवाएँ मदद की गुहार लिए बहती हैं, और धरती मौन रहकर अपनी व्यथा सुनाती है।
आशा की नई सुबह
लेकिन इसी अंधेरे के बीच, भगवान महावीर के संदेशों को आत्मसात करते हुए, आगरा विकास मंच और श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर ने एक नई सुबह की शुरुआत की है। “दिव्यांगों की सेवा दिव्यांगों के द्वार” के इस पावन संकल्प के तहत, पचगई खेड़ा और आसपास के गाँवों के उन लोगों तक मदद पहुँची, जिनके लिए चलना एक सपना बन गया था। जयपुर फुट, ट्राइसाइकिल और कैलिपर्स जैसे उपकरणों ने न केवल उनके पैरों को बल दिया, बल्कि उनके मन में आत्मविश्वास की लौ भी जगा दी।
चमत्कार का जीवंत दृश्य
देवेंद्र सविता दिव्यांग सेंटर, ओम साइन गार्डन, ककुआ, ग्वालियर रोड, आगरा में आयोजित इस शिविर में एक चमत्कारिक दृश्य देखने को मिला। मोबाइल वैन में जयपुर फुट बनाने का पूरा कारखाना लेकर आए विशेषज्ञों ने मौके पर ही चार जयपुर फुट और दो कैलिपर्स तैयार किए। जो लोग दूसरों के सहारे लंगड़ाते हुए आए थे, वे अपने पैरों पर खड़े होकर, मुस्कुराते हुए लौटे। उनकी आँखों में आँसुओं के साथ-साथ एक नई उम्मीद की चमक थी। यह दृश्य हर किसी के लिए आश्चर्य और भावुकता का मिश्रण बन गया।
आत्मनिर्भरता का संकल्प
आगरा विकास मंच के अध्यक्ष राजकुमार जैन और संयोजक सुनील कुमार जैन ने बताया कि इस सेवा के पीछे एकमात्र उद्देश्य था—दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाना। पचगई खेड़ा के निवासियों के लिए न केवल शारीरिक सहायता, बल्कि रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएँगे, ताकि वे अपने जीवन को सम्मान के साथ जी सकें। व्यवस्थाओं को संभालने वाले देवेंद्र सिंह सविता, जो स्वयं दिव्यांग हैं, इस सेवा के प्रेरणास्त्रोत बने।
संपादकीय टिप्पणी: करुणा की गंगा-जमुना
भगवान महावीर की जयंती पर इस वर्ष पहली बार तीन दिवसीय सेवा और करुणा की गंगा-जमुना बही है। यह आयोजन न केवल दिव्यांगों के जीवन में प्रकाश लाया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि मानवता की सच्ची पूजा दूसरों की पीड़ा को दूर करने में ही निहित है। यह प्रयास एक मिसाल है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो हर असंभव को संभव बनाया जा सकता है। भगवान महावीर के अहिंसा और करुणा के संदेश को आत्मसात करते हुए, यह सेवा कार्य आगे भी जारी रहना चाहिए, ताकि हर जरूरतमंद तक मदद की किरण पहुँच सके।
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