नींद में दांत पीसने को मेडिकल भाषा में ब्रक्सिज्म (bruxism) कहा जाता है। आमतौर पर लोग गहरी नींद में सोते समय ऐसा करते हैं। इस आदत से दांतों को नुकसान हो सकता है। ओरल रिहैब्लिटेशन में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक सोने के दौरान किशोर अगर दांत पीसता है तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि उसे स्कूल में डराया जा रहा है। यह रिसर्च ब्रिटेन में दांतों के स्वास्थ्य के लिए काम करने वाली एक संस्था की है। इसमें पाया गया है कि जिन किशोरों को डराया धमकाया जाता है, उन्हें नींद में दांत पीसने की समस्या हो सकती है। नींद में दांत पीसने से सिरदर्द, दांत गिरना और मुंह में कई तरह के दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ताकि न बिगड़े बात
गंभीर रूप से दांत पीसने से दांत फ्रैक्चर हो सकता है, दांत टूट सकते हैं या दांत ढीले भी पड़ सकते हैं। यह आपके जबड़ों को प्रभावित कर सकता है इसलिए अगर आपको पता चले कि आप अक्सर अपने दांत पीसते हैं तो आपको तुरंत दंत रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। कुछ लोगों में ऐंटि-डिप्रेसेंट लेने के बाद अक्सर ब्रक्सिजम की शुरुआत हो सकती है।
ये उपाय हैं कारगर
सोडा, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स लेना बंद करें और बहुत ज्यादा चॉकलेट न खाएं। कैफीन उत्तेजक पदार्थ दिमाग, जबड़े की मांसपेशियों को, खासतौर से रात में विश्राम नहीं करने देगा।
पेंसिल-पेन न चबाएं
अगर आप तनाव होने पर पेंसिल या पेन चबाते हैं तो इस आदत को छोड़ दें। यह आदत छुड़ाने के लिए चूइंग गम या मिंट ले सकते हैं। कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा खाने में बढ़ाएं।
तनाव न लें
तनाव, दांत पीसने का एक बहुत बड़ा कारण है। ऐसे में तनाव कम करने के लिए स्ट्रेस काउंसिलिंग में शामिल हो सकते हैं।
ब्रक्सिजम के लक्षण
एक धीमा, लगातार बना रहने वाला सिरदर्द, जबड़े में पीड़ा होना
जैसे ही आप नींद से जागते हैं, दांत पीसने की आवाज सुनाई देना
गर्मी, ठंडक या ब्रश करने पर दांतों में झनझनाहट, मसूड़ों की सूजन
मेडिटेशन और समय पर सोने से भी इस समस्या से निजात मिल जाती है।
ऐल्कॉहॉल के इस्तेमाल से समस्या बढ़ सकती है। लिहाजा शराब का सेवन कम करें।
-एजेंसी
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