आगरा: शहर के एम.डी. जैन परिसर स्थित आचार्य शांति सागर सभागार में रविवार को एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। आगरा दिगम्बर जैन परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस सभा में आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज, गणिनी शिरोमणि आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी और आर्यिका विज्ञमति माताजी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। इस आध्यात्मिक समागम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा और पूरा परिसर जैनत्व के जयकारों से गूंज उठा।
अष्ट मूल गुणों का पालन ही आत्मशुद्धि का मार्ग
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञमति माताजी ने ‘पुरुषार्थ सिद्धि’ ग्रंथ का सार समझाते हुए कहा कि जैन धर्म केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति अष्ट मूल गुणों का पालन नहीं करता, तो वह जैन धर्म के वास्तविक उपदेशों से दूर है। माताजी ने जोर देकर कहा कि मधु, मांस, मद्य और पांच उदुम्बर फलों का त्याग हर जैन के जीवन का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए, क्योंकि यही आत्मशुद्धि का मूल आधार है।
युवा पीढ़ी को खान-पान के प्रति किया आगाह
आधुनिक युग की फास्ट फूड संस्कृति पर चिंता व्यक्त करते हुए आर्यिका माताजी ने युवाओं से विशेष संवाद किया। उन्होंने पिज्जा, मैगी और मोमोज जैसी वस्तुओं के सेवन के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं। संयमित खान-पान और शुद्ध आचरण ही व्यक्ति को आत्मिक शांति और कल्याण की ओर ले जाते हैं।
आचार्य इन्द्रनंदी महाराज का मार्गदर्शन
आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ने अपने अमृत वचनों से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि उसे अपने दैनिक व्यवहार में उतारना है। जब मनुष्य का आचरण तप और संयम के सांचे में ढल जाता है, तभी मोक्षमार्ग प्रशस्त होता है।
बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
कार्यक्रम का संचालन अनुज जैन ‘क्रांति’ ने किया। इस दौरान आगरा दिगम्बर जैन परिषद के अध्यक्ष पन्नालाल बैनाड़ा, महामंत्री मनीष कुमार जैन और कोषाध्यक्ष राकेश जैन ‘पर्दे वाले’ सहित परिषद के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने जानकारी दी कि 8 जून 2026 को सुबह 8:15 बजे से पुनः मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के मंगल प्रवचन आयोजित होंगे, जिसमें अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया है।
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