मुरादाबाद: समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद जावेद अली खान का एक बयान इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मुरादाबाद में आयोजित ‘पीडीए सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उन्होंने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से बाहर करने के लिए एक अनोखा ‘चुनावी फॉर्मूला’ पेश किया है।
‘दोस्ती के जरिए बीजेपी का अंत’
पीडीए सम्मेलन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और मुस्लिम युवाओं को संबोधित करते हुए सांसद जावेद अली ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल अपने समाज तक सीमित रहना काफी नहीं है। उन्होंने कहा, “आप पार्टी कार्यकर्ता हैं, तो कम से कम 4 ऐसे हिंदू दोस्त बनाइए जिन पर आपका गहरा भरोसा हो। केवल 4 मुसलमान दोस्तों के साथ मिलकर आप बीजेपी को नहीं हरा सकते।” उन्होंने आगे तर्क दिया कि जब तक एक मुस्लिम कार्यकर्ता के 4 ऐसे हिंदू मित्र नहीं होंगे, जो यह भरोसा करें कि ‘खान साहब’ या ‘हुसैन साहब’ जो कह रहे हैं, वह उनके मतलब की बात है, तब तक परिणाम बदलना मुश्किल है।
सांसद ने दावे के साथ कहा कि जिस दिन प्रदेश का प्रत्येक मुस्लिम कार्यकर्ता 4-4 गैर-मुस्लिम या हिंदू भाइयों को अपना मित्र बना लेगा और उन्हें अपनी विचारधारा से जोड़ लेगा, उसी दिन उत्तर प्रदेश में भाजपा का अंत निश्चित हो जाएगा।
पीडीए सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे सांसद
बता दें कि जावेद अली खान रविवार देर शाम मुरादाबाद में आयोजित सपा के इस बड़े ‘पीडीए सम्मेलन’ में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान मंच से उन्होंने जिस तरह ‘दोस्ती’ को चुनावी रणनीति से जोड़कर पेश किया, उसने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
सियासी बयानबाजी और प्रतिक्रियाएं
जावेद अली का यह बयान समाजवादी पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी अब केवल ‘माइनॉरिटी वोट बैंक’ से आगे बढ़कर ‘सबको साथ लेने’ और ‘हिंदू-मुस्लिम एकता’ के संदेश के जरिए वोट प्रतिशत बढ़ाने पर जोर दे रही है। हालांकि, उनके इस बयान के सामने आते ही सियासी हलकों में प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। विरोधी दलों के नेता इस बयान को ‘तुष्टीकरण’ और ‘चुनावी लाभ’ के नजरिए से देख रहे हैं।
सपा सांसद का यह ‘4-4 दोस्त वाला फॉर्मूला’ अब सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है, जहां लोग इसे आने वाले विधानसभा चुनाव में सपा की जमीनी रणनीति के रूप में देख रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी का यह नया प्रयोग ज़मीनी स्तर पर क्या असर दिखाता है।
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