बरेली में चाइनीज मांझे का खूनी खेल: गन्ना राज्यमंत्री संजय गंगवार के 15 वर्षीय भतीजे की गर्दन कटी, हालत गंभीर

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बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में एक बार फिर प्रतिबंधित चाइनीज मांझे ने अपनी जानलेवा ताकत दिखाई है। इस बार इसका शिकार गन्ना राज्यमंत्री संजय गंगवार के 15 वर्षीय भतीजे आदित्य वीर सिंह गंगवार हुए। हादसे के बाद शहर में प्रतिबंधित डोर की खुलेआम बिक्री और प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है।

फ्लाईओवर पर हुआ दर्दनाक हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, आदित्य वीर सिंह गंगवार अपनी स्कूटी से स्टेडियम की ओर जा रहा था। जैसे ही वह व्यस्त श्यामगंज फ्लाईओवर से गुजरा, हवा में झूल रहा चाइनीज मांझा उसकी गर्दन में आकर लिपट गया। मांझा इतना धारदार था कि आदित्य को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उसकी गर्दन पर गहरा जख्म हो गया।

खून से लथपथ होकर आदित्य सड़क पर गिर पड़ा, जिससे आसपास के राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और उसे आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी निजी अस्पताल ले गए।

अस्पताल के अनुसार, किशोर की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और चिकित्सकों की टीम लगातार उस पर निगरानी रखे हुए है।

​मंत्री ने जताई सख्त नाराजगी

घटना की सूचना मिलते ही गन्ना राज्यमंत्री संजय गंगवार ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए और सीधे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अपने भतीजे का हाल जाना और चिकित्सकों से बेहतर उपचार सुनिश्चित करने को कहा। मीडिया से मुखातिब होते हुए राज्यमंत्री ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बाजार में उपलब्धता पर गहरा रोष प्रकट किया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब सरकार ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, तो फिर यह जानलेवा डोर बाजार में कैसे पहुंच रही है? मंत्री ने जिला प्रशासन से मामले की गहन जांच करने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

प्रशासनिक दावों की खुली पोल

गौरतलब है कि बरेली समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में चाइनीज मांझे के कारण पूर्व में भी कई मासूमों की जान जा चुकी है और कई लोग अपाहिज हो चुके हैं। प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाकर प्रतिबंध का दावा करता है, लेकिन ताजा घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।

आदित्य के पिता अजय सिंह गंगवार (पीलीभीत के ललौरी खेड़ा के ब्लॉक प्रमुख) और मां सीमा गंगवार (रेलवे अधिकारी) के परिवार में इस हादसे के बाद गहरा दुख और चिंता का माहौल है। यह घटना अब एक बड़ा मुद्दा बन गई है कि आखिर कब तक लोग इस ‘मौत की डोर’ की भेंट चढ़ते रहेंगे।

Dr. Bhanu Pratap Singh