Live Story Time
Agra, Uttar Pradesh, Bharat, India. एस.एन.मेडिकल कॉलेज आगरा (SN Medical College Agra) में दुर्लभ बीमारी ईएचपीवीओ (EHPVO) के लिए पहली बार शंट सर्जरी की गई है। इस तरह की सर्जरी पहली बार एसएनएमसी आगरा में की गई। पहले मरीजों को ऐसी जटिल सर्जरी के लिए दिल्ली जैसे महानगरों में जाना पड़ता था। यह सराहनीय काम गैस्ट्रो विशेषज्ञ चिकित्सकों ने किया है। जानते हैं यह कौन सी बीमारी है, इसके क्या लक्षण हैं।
13 साल की एक लड़की 6 साल से खून की उल्टी, प्लीहा बढ़ने (स्प्लेनोमेगाली/ हाइपरस्प्लेनिज़्म), शीघ्र तृप्ति और विकास मंदता के कई लक्षणों से पीड़ित थी। गैस्ट्रोसर्जरी ओपीडी एसएनएमसी आगरा में परामर्श लिया। उचित जांच एवं मूल्यांकन के बाद पता चला कि उसे एक्स्ट्रा हेपेटिक पोर्टल वेनस ऑब्स्ट्रक्शन (ईएचपीवीओ) है। सर्जरी के बाद संक्रमण से बचने के लिए सर्जरी से पहले उसे ट्रिपल टीकाकरण न्यूमोकोकल, एच इन्फ्लूएंजा, मेनिंगोकोकल टीका लगाया गया था। मरीज़ ऑपरेशन से पूर्व प्लेटलेट व खून की कमी से भी जूझ रही थी जिसकी आपूर्ति ऑपरेशन के दौरान खून देकर की गई।
गैस्ट्रोसर्जरी टीम के डॉ. प्रतीक शाह (सहायक प्रोफेसर), डॉ. विक्रम सिंह सोढ़ा (सहायक प्रोफेसर), डॉ. नीलांशा डॉ. रेनू, डॉ. नरेंद्र (एनेस्थीसिया) द्वारा प्रॉक्सिमल स्प्लेनोरेनल शंट (पीएसआरएस) दिया गया।
इस सर्जरी में बायीं वृक्क शिरा से जुड़ी हुई प्लीहा शिरा सहित प्लीहा को हटाना शामिल है। ऑपरेशन के बाद का कोर्स सफल एवं प्रभावशाली रहा और उसे ऑपरेशन के पांचवें दिन छुट्टी दे दी गई। डिस्चार्ज के समय मरीज और उसके परिवार के सदस्य खुश थे।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने कहा सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा जटिल सर्जरी सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज आगरा में की जा रही है, जिससे आगरा एवं आसपास के मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।
एक्स्ट्रा हेपेटिक पोर्टल वेनस ऑब्स्ट्रक्शन (ईएचपीवीओ) रोग में आमतौर पर जीवन के पहले और दूसरे दशक के मरीज शामिल होते हैं। कारण बहुक्रियाशील होते हैं जैसे गर्भनाल की अस्वच्छ देखभाल, जन्म के समय रक्त का आदान-प्रदान, आंत्र संक्रमण, हाइपरकोगुलोपैथी (रक्त जमावट विकार)। मरीज़ आमतौर पर हेमटेमिसिस, प्लीहा बढ़ने (स्प्लेनोमेगाली/ हाइपरस्प्लेनिज़्म), विकास मंदता के आवर्ती के साथ उपस्थित होते हैं।
To read Dr Bhanu Pratap Singh books please Click this link on WhatsApp:
मीडिया प्रभारी डॉक्टर प्रीति भारद्वाज ने बताया कि इस रोग के निदान के तरीके ultrasound abdomen पेट रंग डॉपलर, एंडोस्कोपी हैं। ईएचपीवीओ रोगियों का इलाज विशेषज्ञ गैस्ट्रो सर्जन द्वारा शंट सर्जरी द्वारा किया जाता है।
- ताज महोत्सव 2026: ‘ग्रीन आगरा’ के दावों की खुली पोल, टीटीजेड में नियम ताक पर; जहर उगल रहे प्रतिबंधित जनरेटर - February 17, 2026
- यूजीसी एक्ट पर संग्राम: करणी सेना अध्यक्ष ने आगरा डीएम को सौंपा 10 सूत्रीय ज्ञापन, डॉ. राज शेखावत ने एक्ट को बताया असंवैधानिक - February 17, 2026
- Agra News: डौकी के रामाशीष कोल्ड स्टोरेज में अग्नि तांडव, शॉर्ट सर्किट से लाखों का वारदाना खाक - February 17, 2026