परिवारों ने साथ एक साथ की वृक्षों की पूजा, ईसाई समाज के बंधुओं में भारी उत्साह
Agra (Uttar pradesh, India)। जन सामान्य में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पर्यावरण गतिविधि एवं हिन्दू आध्यात्मिक सेवा प्रतिष्ठान के तत्वावधान में आज अपने- अपने घर पर परिवारों ने वृक्षों का पूजन कर प्रकृति का वंदन किया। ईसाई समाज के बंधुओं में भारी उत्साह देखा गया। आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने प्रकृति के महत्व को रेखांकित किया।
परिक्रमा भी की
कार्यक्रम के अंतर्गत परिवारों ने पौधे या वृक्ष के सामने जाकर हाथ जोड़कर उसका ध्यान किया। फिर 3 बार ओंकार का उच्चारण करते हुए पौधे या वृक्ष को तिलक-चंदन लगाकर अक्षत चढ़ाया। उसके बाद पेड़ को रक्षासूत्र या मौली बांध कर जल चढाते हुए आरती गाकर वृक्ष की पांच बार परिक्रमा की। कार्यक्रम को लेकर नगर की पर्यावरण से जुड़ी संस्थाओं के साथ आगरा विभाग के तीनों महानगर, फतेहाबाद जिला, फतेहपुरसीकरी, शमसाबाद आदि ग्रामीण अंचलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में सभी को आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी व ब्रज के संत रमेश बाबा का मार्गदर्शन भी मिला।
क्या कहा सरसंघचालक ने
अपने ऑनलाइन संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय जीवन शैली प्रकृति पोषक है, हम प्रकृति को 2000 वर्षों से पूजन कर जीवन जी रहे हैं, जबकि दुनिया का तरीका पर्यावरण के अनुकूल नही है। भारतीय जीवन शैली पुनर्जीवित हो, आने वाली पीढ़ी भी उस पर चले यह प्रयास लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि दुनिया में हम पर्यावरण शब्द बहुत सुनते हैं, पर्यावरण दिवस भी तय है। लेकिन वो यह सोचते हैं कि प्रकृति का दायित्व मनुष्य पर नहीं है और मनुष्य का पूरा अधिकार प्रकृति पर है। हम भी पिछले 300 वर्षों से इसी सोच के साथ जी रहे हैं जिसका दुष्परिणाम सबके सामने है। यदि ऐसा रहा तो न हम बचेंगे और न ही सृष्टि बचेगी। अतः जब विश्व के लोगों का ध्यान इस ओर गया तो पर्यावरण दिवस मनाने लगे लेकिन पर्यावरण कैसे बचेगा वे यह चिंता नही करते। प्रकृति के इस सत्य को हमारे पूर्वजों ने समझा था और प्रकृति का पूजन किया था। उन्होंने कहा कि पेड़ में भी प्राण है, यह शुरू से भारत के लोग जानते हैं। शाम में पेड़ को नहीं छुआ जाता था। अपने यहां घरों में सबका पोषण करने का भाव शुरू से रहा है। चींटी, गौ, कुत्ता व जरूरतमंद आदि को भोजन घरों में कराया जाता रहा है।

किस महानगर में कितने स्थानों पर पूजन
विभाग प्रचार प्रमुख मनमोहन निरंकारी ने बताया कि आगरा जिले में प्रकृति वंदना के 5485 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए। जिसमें छावनी महानगर में 1036 स्थानों पर, पूर्वी महानगर में 902 स्थानों पर, पश्चिम महानगर में 861 स्थानों ,पर रामबाग में 887 स्थानों पर, फतेहपुर सीकरी में 896 स्थानों पर, फतेहबाद में 883 स्थानों पर प्रकृति वंदन कार्यकम हुए। आगरा से 29997 घरों ने प्रकृति वन्दन कार्यक्रम में अपना पंजीकरण कराया था। सभी ने अपने अपने परिवार के साथ निज निवास पर वृक्षों के सामने बैठकर रोली चावल चढ़ाया और कलावा बांध कर प्रकृति वन्दना की।
आगरा किला के सामने पौधारोपण
आगरा किला के सामने शाहजहां गार्डन में विभाग प्रचारक धर्मेद्र ने मंदार के पौधों का रोपण किया। यहीं पर भाजपा क्षेत्रीय संगठनमंत्री भवानी सिंह ने रूद्राक्ष के पौधे का रोपण किया। इसके अलावा प्रकृति वंदन कार्यक्रम को लेकर ईसाई समाज के बंधुओं में भी भारी उत्साह देखा गया। सेंट मेरी चर्च में फादर मून ने चर्च के पुरोहितों व सिस्टर्स के साथ चर्च परिसर में 11 पौधों का रोपण किया। उन्होंने संघ के प्रकृति वंदन कार्यक्रम के आव्हान की प्रशंसा करते हुए इसे वर्ष में एक बार जरूर आयोजित करने की बात कही। चर्च में छोटे बच्चों ने भी प्रकृति वंदन कार्यक्रम में सहभागिता की।
उल्लेखनीय उपस्थित
प्रकृति वंदन कार्यक्रम में प्रकृति वंदन कार्यक्रम के सह संयोजक उद्यमी राकेश गर्ग, समाजसेवी पूरन डाबर, प्रांत सह कार्यवाह प्रमोद शर्मा, प्रांत प्रचार प्रमुख केशव शर्मा, सुभाष वोहरा, विभाग संघ चालक हरिशंकर शर्मा, विभाग कार्यवाह पंकज खंडेलवाल, विभाग सह कार्यवाह सुनील दीक्षित, सुभाष अग्रवाल, एड. अशोक चैबे, पूर्वी महानगर से महानगर संघ चालक मुरारी लाल कश्यप, पश्चिम महानगर से विजय गोयल, नमन, सचिन, पर्यावरण संरक्षण विभाग संयोजक प्रदीप मंगल और छावनी महानगर कार्यवाह खगेश कुमार, पर्यावरण भाग संयोजक प्रवीण वर्मा, सतीजा, भूपेश वर्मा आदि उपस्थित रहे।
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