राष्ट्रीय वंचित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार यादव की करीब दो हजार कि.मी. लम्बी चुनावी यात्रा
बुंदेलखंड से होते हुए चंबल के बीहड़ों में वंचितों के बीच दो दर्जन से अधिक सभाएं, सुनने के लिए आतुरता दिखी
Bhopal (Madhya Pradesh, India)। अभी हाल ही के दिनों में राष्ट्रीय वंचित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार यादव ने करीब दो हजार कि.मी. से ज्यादा की चुनावी यात्रा की है। यह यात्रा करीब पूरे चार दिनों तक नॉन स्टाप चली। यात्रा का शुभारंभ भोपाल से विदिशा से होते हुए टीकमगढ़ और राजा राम की नगरी ओरछा से हुआ। फिर यात्रा समूचे बुंदेलखंड से होते हुए चंबल के बीहड़ों में वंचितों और संसाधनों से विहीन लोगों का हाल जानने के लिए पहुंची। चार दिनों के दौरान राष्ट्रीय वंचित पार्टी के मुखिया सुशील कुमार यादव ने दो दर्जन से अधिक जनसभाएं की। दस हजार से अधिक लोगों से प्रत्यक्ष और लाखों लोगों से अप्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया।
उपचुनाव पर पड़ेगा प्रभाव
पूरे संवाद की थीम वंचितों के हक और उन्हें मिलने वाले अधिकारों पर आधारित थी। बुंदेलखंड और चंबल मध्य प्रदेश के वही अंचल हैं, जहां गरीबी, बेकारी, नशा व अपराध की जड़ें काफी गहराई तक घर कर गर्इं हैं। राजनीतिक गलियारों में वंचितों के लिए किए गए इस दौरे को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही है। सभी विश्लेषक अपनी-अपनी नजर से इस यात्रा की विवेचना कर रहे हैं। बात कुछ भी हो लेकिन श्री यादव ने जिस तरह से प्रदेश के इन दो हिस्सों में वंचितों की फौज तैयार की है, यह आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक दलों के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। इसका प्रभाव न सिर्फ वर्तमान उपचुनाव में पड़ेगा बल्कि आने वाले राजनीतिक कालखंड में भी पड़ेगा।
अंगारा बनेगा दीया
यह दौरा सिर्फ वर्तमान का कोई राजनीतिक दौरा नहीं बल्कि जनमत निर्माण का एक बड़ा सूत्र है। तभी तो जनसंवाद और जनसंपर्क के साथ-साथ वंचितों के हक के लिए लड़ने वालों की जिम्मेदारियां इन क्षेत्रों में सतत तय की जा रही हैं। राष्ट्रीय वंचित पार्टी के रूप में वंचितों के लिए जलने वाला ये दीया आने वाले समय में अंगारा बनकर नशा, अपराध, बेरोजगारी, बेकारी समेत भ्रष्टाचार को जलाकर राख कर सकता है। इस दल ने वंचितों व दलितों का निर्धारण जन्म के अधार पर नहीं संसाधनों के आधार पर किया है। इस कारण पार्टी हर एक पिछड़े को वंचित और दलित कह रही है।

बदलाव चाहता है वंचित
पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना ये भी है कि हमारी कौम हर एक समाज और जाति में है। हम सब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में वंचितों के हक के लिए लड़ते रहेंगे। अभी तो ये शुरूआत है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिनेश सिंह सिकरवार एडवोकेट का कहन है कि सुशील कुमार यादव की चुनावी यात्रा से साफ हो गया है कि वंचित आज भी वंचित है। वह बदलाव चाहता है। राष्ट्रीय वंचित पार्टी इस बदलाव का वाहक बनेगी।

सुख-दुख का भागीदार
राष्ट्रीय वंचित पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और जाने-माने पत्रकार जयसिंह चौहान कहते हैं कि किसी भी पार्टी के एजेंडे में वंचित है ही नहीं। केवल आरवीपी ने वंचितों को एजेंडे में लिया है। हम कहते हैं कि वंचित ही दलित है। मतलब जो भूखा है, रोजगारविहीन है, कष्ट में है, वही दलित है। इसका जाति से कोई लेना-देना नहीं है। अन्य दलों के लिए दलित जाति से है भले ही वह आईएएस और आईपीएस हो क्यों न। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार यादव की लम्बी यात्रा ने वंचितों को नया सूरज दिखाया है। उनमें यह आशा जगी है कि कोई है तो है जो उनकी बात कह रहा है, उनके बीच जा रहा है और उनकी सुख-दुख का भागीदार है।

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