आगरा का राजामंडी जमीन विवाद: सुप्रीम कोर्ट की अवमानना में फंसे UP के 8 बड़े अफसर, प्रमुख सचिव को भी बनाया पक्षकार

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आगरा: ताजनगरी के हृदय स्थल राजा की मंडी बाजार स्थित चंद्रलोक होटल और आसपास की दुकानों से जुड़ा सरकारी जमीन कब्जा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद अतिक्रमण न हटाए जाने पर वादी अमरजोत सिंह सूरी ने अब न्यायालय में अवमानना याचिका (Contempt Petition) दाखिल कर दी है। इस याचिका ने उत्तर प्रदेश शासन से लेकर आगरा प्रशासन तक में हड़कंप मचा दिया है।

​प्रमुख सचिव सहित 8 बड़े अफसर घेरे में

​वादी अमरजोत सिंह सूरी द्वारा दायर इस याचिका में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद सहित आगरा के मंडलायुक्त, जिलाधिकारी (DM), और नगर आयुक्त को मुख्य रूप से पक्षकार बनाया गया है। इनके अलावा एडीएम, एसडीएम और सहायक नगर आयुक्त को भी आदेश की अवहेलना का जिम्मेदार ठहराते हुए याचिका में शामिल किया गया है।

​17 फरवरी की डेडलाइन हुई खत्म

​सुप्रीम कोर्ट ने बीते 3 फरवरी को इस मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासन को कड़े निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जों को मुक्त कराकर 17 फरवरी तक रिपोर्ट पेश की जाए। आदेश के अनुपालन में 10 फरवरी को प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पैमाइश की और अवैध निर्माणों पर लाल निशान भी लगाए थे, लेकिन उसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।

​18 साल से चल रही कानूनी जंग

​राजा की मंडी बाजार की इस कीमती जमीन को लेकर विवाद पिछले 18 वर्षों से चल रहा है। कई दौर की जांच में यह साबित हो चुका है कि चंद्रलोक होटल और आसपास की कई दुकानों के निर्माण में सरकारी जमीन को दबाया गया है। पैमाइश के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी जब बुलडोजर नहीं चला, तो वादी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के समयबद्ध आदेश की अनदेखी करना प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भारी पड़ सकता है। अब देखना यह है कि अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद प्रशासन की ओर से क्या सफाई दी जाती है या फिर कार्रवाई में तेजी आती है।

Dr. Bhanu Pratap Singh