राधास्वामी मत के वर्तमान आचार्य और अधिष्ठाता प्रो. अगम प्रसाद माथुर (दादाजी महाराज) सन 1952 ईस्वी में आगरा कॉलेज के इतिहास विभाग में प्रवक्ता के रूप में नियुक्त हुए और तब से सन 1982 ईस्वी तक प्रारंभ हुआ 30 वर्षों के कटु-मधुर अनुभवों, संघर्षों और सफलताओं, प्रेम और वैमनस्य, आलोचनाओं और प्रशंसाओं का एक अनवरत सिलसिला। उनका प्रयास था कि वे एक सच्चे शिल्पी एवं सफल शिक्षक बनें। उन्होंने विद्यार्थियों की समस्या को स्वयं सुलझाया। शिक्षक के रूप में छात्रों से स्नेह पूर्ण व्यवहार और उनकी समस्याओं को अपनी मानकर हल निकालने में उनका कोई सानी नहीं है।
कक्षा में कौन सा छात्र किस क्षमता का है, इस विद्यार्थी की मनोदशा क्या है, यह समझने में उन्हें महारत हासिल थी। छात्रों के मन मस्तिष्क पर एकछत्र राज ही था, जिसके कारण उनकी कक्षाएं आदर्श कक्षा होने का गौरव रखती थीं। कक्षा में उपस्थित विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध करने में दादाजी का कोई जवाब नहीं था। पिन ड्रॉप साइलेंस, कक्षा में भी ध्यान जैसी मुद्रा, कक्षा में फुर्ती के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर चहलकदमी और धाराप्रवाह व्याख्यान, विद्यार्थी उनकी इस अदा के दीवाने थे और अपलक उन्हें निहारते रहते थे।
यूरोप का इतिहास उनका प्रिय विषय था। जब वे नेपोलियन बोनापार्ट का अध्याय पढ़ाते तो नेपोलियन के चरित्र, व्यक्तित्व और कृतित्व का ऐसा खाका खींचते कि नेपोलियन का चरित्र जीवंत हो, कक्षा में बैठे छात्रों के मानस पटल पर अंकित हो जाता था। फ्रांस की क्रांति के कारणों, परिणामों और विश्व पर उसके प्रभाव का वर्णन करते हुए उनकी मुट्ठियां भिंच जाती थीं। जुबान किसी मशीनगन की भांति शब्दों की बौछार करती जाती थी और समूची अवाक, स्तब्ध और सम्मोहित कक्षा में भी जरूर पूछते- एनी क्वेश्चन। (दादा की दात से साभार)
कल पढ़िए कुलपति के रूप में दादाजी महाराज
- Parhaat nettikasinot 2026: Luotettavuus ja bonusten arviointi - June 16, 2026
- Past Win Records and Big Payouts in Big Bass Bonanza Machine for United Kingdom - June 16, 2026
- Gioca dal vivo e vinci subito in Italia su Golisimo Casino - June 15, 2026