आगरा: नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स, यूपी, आगरा ने वर्ष 2025-26 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट के जरिए यह साबित कर दिया है कि वह केवल एक व्यापारिक संस्था नहीं, बल्कि आगरा की प्रगति का सबसे बड़ा पैरोकार है। सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि पिछले एक साल में संस्था ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक आगरा के उद्योग, व्यापार और सामाजिक मुद्दों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ी है।
योगी से सीतारमण तक: नीतिगत बदलावों का बना दबाव
संजय गोयल ने बताया कि चैम्बर के प्रयासों से इस साल आगरा के जूता, हैंडीक्राफ्ट और इंजन उद्योग को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दिए गए सुझावों के बाद जीएसटी (GST) दरों में सुधार हुआ। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद ‘ताज संरक्षित क्षेत्र’ के लिए अलग सेक्टोरियल गाइडलाइंस की मांग पर शासन ने तत्काल निर्देश जारी किए। यह आगरा के उद्योगों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ है।
ट्रैफिक से लेकर पर्यटन तक: जमीन पर दिखा असर
चैम्बर ने शहर की नब्ज पर पकड़ बनाए रखी। आगरा की ट्रैफिक समस्या को सुलझाने के लिए डीसीपी ट्रैफिक के साथ बैठक कर रेड लाइट का समय 180 सेकेंड से घटाकर 60 सेकेंड करवाया गया। इतना ही नहीं, सींगना गांव के शांता घाट को पर्यटन स्थल बनाने के चैम्बर के प्रस्ताव पर सरकार ने सर्वे भी शुरू कर दिया है। बिजली (टोरंट), पानी (जलकल) और नगर निगम से जुड़ी स्थानीय समस्याओं का भी त्वरित निस्तारण कराया गया।
विरासत संरक्षण और पर्यावरण की चिंता
चैम्बर ने व्यापार के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी प्राथमिकता दी। नगला रामबल स्थित ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह स्थल का सौंदर्यीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य चैम्बर की पहल पर ही शुरू हुआ। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया और चंबल सफारी को सरकारी नियंत्रण में लाने की पुरजोर मांग उठाई गई।
AI और महिला उद्यमिता: आधुनिक आगरा की नींव
बदलते दौर के साथ कदम मिलाते हुए चैम्बर ने महिला उद्यमियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सेमिनार आयोजित किए। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में संस्था का 77वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस वर्ष संस्था से 228 नए सदस्य जुड़े और 25 लाख रुपये की सावधि जमा (FD) के साथ चैम्बर की आर्थिक स्थिति को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान की गई।
अभी लंबी है लड़ाई: यमुना बैराज और आईटी सिटी पर नजर
संजय गोयल ने स्पष्ट किया कि कई बड़ी उपलब्धियों के बावजूद आगरा के लिए यमुना बैराज, आईटी सिटी, इंटरनेशनल स्टेडियम, फिल्म सिटी और लॉ यूनिवर्सिटी जैसी मांगें अभी भी शासन स्तर पर लंबित हैं। उन्होंने संकल्प दोहराया कि इन प्रोजेक्ट्स को हकीकत में बदलने तक चैम्बर का संघर्ष और संवाद जारी रहेगा।
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