अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में एक समावेशी सरकार का गठन और महिलाओं के अधिकारों का सम्मान अफ़ग़ानों की इच्छा है, न कि केवल अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की.
अफ़ग़ानिस्तान के न्यूज़ चैनल टोलो न्यूज़ को दिए गए एक इंटरव्यू में करज़ई ने कहा कि उन्होंने और चेयरमैन अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने इस्लामिक अमीरात को एक पत्र में राजनीतिक सुलह प्रक्रिया और राजनीतिक नेताओं के साथ एक लोया जिरगा (नेशनल असेंबली) को लेकर मुलाक़ात का प्रस्ताव दिया है ताकि देश के लिए भविष्य का मार्ग तय किया जा सके.
पूर्व राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि अफ़ग़ानों को विदेशियों के प्रस्तावों की प्रतीक्षा करने के बजाय देश की मौजूदा स्थितियों का ख़ुद समाधान खोजना चाहिए.
उन्होंने बताया, ‘हमने कुछ अफ़ग़ान राजनेताओं को राजनीति और राष्ट्रीय जुड़ाव को लेकर बातचीत की पेशकश की. एक ऐसा शिखर सम्मेलन हो जिसमें अफ़ग़ानिस्तान की महिलाएं और पुरुष दोनों मौजूद हों और लोया जिरगा को आयोजित करने की हमारी राष्ट्रीय और ऐतिहासिक परंपरा शुरू हो सके.’
एक समावेशी सरकार का गठन और मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करना वर्तमान अफ़ग़ान सरकार की मान्यता पर विचार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पहली शर्त है.
करज़ई ने कहा कि ‘दुनिया चाहती है या नहीं? संयुक्त राष्ट्र अफ़ग़ानों को बुलाता है या नहीं, संयुक्त राष्ट्र कार्यवाहक सरकार को बुलाता है या नहीं, इन सबसे पहले यह अफ़ग़ानों की पहली इच्छा है कि एक समावेशी और राष्ट्रीय सरकार हो जो सभी का प्रतिनिधित्व करे और महिलाओं के अधिकारों और समाज में उनकी भूमिका और शिक्षा तक लड़कियों की पहुँच सुनिश्चित करे. ये हमारे बुनियादी सिद्धांत हैं और ये होना ही चाहिए.’
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