नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पिछले 11 वर्षों के शासनकाल में सरकार की नीतियों और गंभीर मुद्दों से निपटने के तरीके पर सवाल उठाते हुए जल, वायु प्रदूषण और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरी चिंता जताई।
जल और प्रदूषण पर सरकार को घेरा
कपिल सिब्बल ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में भाजपा ने 15 साल और यूपीए ने 10 साल शासन किया, लेकिन क्या कभी यह सोचा गया कि आम आदमी को साफ पानी और स्वच्छ हवा मिल रही है या नहीं। उन्होंने “हर घर नल से जल” योजना का जिक्र करते हुए कहा कि न नल दिखाई दे रहा है और न ही जल, बल्कि हालात ऐसे हैं कि “देश जल रहा है।”
कानून-व्यवस्था पर सवाल, मणिपुर का हवाला
देश की कानून-व्यवस्था को लेकर सिब्बल ने कहा कि जहां देखो, हत्या और हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने मणिपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हालात बेहद गंभीर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी रही।
अरावली और जल संकट पर चेतावनी
सिब्बल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दिल्ली को स्वच्छ जल देने वाली अरावली पर्वतमाला को नष्ट करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है और खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में जल संकट और गहराएगा। इंदौर की जल स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
“हर इंसान को चाहिए साफ हवा और साफ पानी”
कपिल सिब्बल ने कहा कि किसी भी नागरिक की बुनियादी जरूरतें साफ हवा और स्वच्छ पानी हैं, लेकिन दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति ‘जीरो पॉल्यूशन’ की बातों तक ही सीमित रह गई है।
सद्भाव और सुरक्षा पर भी उठाए सवाल
सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां चर्चों में जाकर लोगों का अभिवादन करते हैं, वहीं बजरंग दल से जुड़े लोग हिंसा की घटनाओं को अंजाम देते नजर आते हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है।
चुनाव आयोग पर भी लगाए आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कपिल सिब्बल ने भारत निर्वाचन आयोग पर भी विपक्ष के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज देश के असली मुद्दों—शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार—से ध्यान हटाकर मतदाता सूची की सफाई और चुनावी प्रक्रियाओं पर विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
कपिल सिब्बल ने निष्कर्ष रूप में कहा कि बीते 11 वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर कोई ठोस और जमीन पर लागू होने वाली नई नीति नहीं लाई गई, जो लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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