Agra, Uttar Pradesh, India. गुरुवर आदर्श रत्न सागर सुरीश्वर जी महाराज और जैन संत अक्षत सागर महाराज विदिशा से विहार करते हुए समाज में धर्म की प्रवाहना कर रहे हैं। धर्म की कठिन डगर पर चलने की आसान ट्रिक बताते हैं। वे यह भी कहते हैं कि जैन धर्म में इंसान भगवान बन सकता है। सीमंतर स्वामी भगवान का विचरण दुनिया में चल रहा है।
गुरुवर आदर्श रत्न सागर सुरीश्वर जी महाराज और जैन संत अक्षत सागर महाराज आठ साधु-साध्वियों के साथ विदिशा से विहार करते हुए समाज में धर्म की प्रवाहना कर रहे हैं। उनके साथ एक जैन संत ऐसे भी हैं जिन्होंने मिसाइल मैन अब्दुल कलाम आजाद के साथ काम किया है। वे अपने गुरु की सेवा में लीन रहते हैं। जैन संतों की यह समूह धर्म की कठिन डगर पर चलने की आसान ट्रिक बताता है। जैन दादाबाड़ी के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त करके उन्हें सुखद आश्चर्य हुआ। दादाबाड़ी का इतिहास हर किसी को धर्म के प्रति दृढ़ रहने के लिए प्रेरित करता है। आदर्श रत्न सागर सुरीश्वर जी महाराज ने तो चौबीस जिनालय में स्थापित प्रतिमा के सात स्वयं को आत्मसात कर लिया है। श्री वर्धमान महावारी स्वामी जैन मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान मंदिर का प्राचीन द्वार मिला। अब मंदिर में गुफा के माध्यम से प्रवेश हो रहा है। इस मंदिर में कई साधु तपस्यारत हैं। इन्हीं जैन साधुओं के साथ हितेश भाई विहार कर रहे हैं। जैन दादाबाड़ी, शाहगंज, आगरा में रुके हुए हैं।
आदर्श रत्न सागर मूलतः जैन नहीं, पटेल थे। उन्होंने 24 साल की उम्र में दीक्षा ली। वे बताते हैं- जैन धर्म कोई जाति या नाम नहीं है। जिनीश्वर परमात्मा को जो मानता है, वह जैन है। जिसने अपनी इंद्रियों, राग-द्वेष को जीता है, क्रोध, लोभ, मोह, माया, को जीता है, अपने दुर्गुणों को दूर करने के लिए जो प्रयत्नशील है, वह जैन है। हमारे परमात्मा वीतराग हैं। गुजरात और राजस्थान में जैन धर्म की प्रवाहना है। सच्ची शांति स्व में मिलती है। डॉक्टर, इंजीनियर आदि स्व के मार्ग पर आ रहे हैं। दुबई से हितेश भाई करोड़ का पैकेज छोड़कर दीक्षा ले रहे हैं। जैन धर्म के सात नियमों पर दृढ़ रहें तो पथभ्रष्ट नहीं हो सकते हैं। इन नियमों के कारण लोग धर्म पर दृढ़ रहे हैं। जहां तक श्वेताम्बर और दिगम्बर जैन की बात है तो यह त्याग तपस्या की बात है। कोई नग्न हो जाए, मुंडन करा ले, भभूत लगा ले और राग-द्वेष को नहीं जीता तो महान नहीं है। अवगुणों को जीता तो महान है। मुझे त्याग-तपस्या पसंद है। मैं मोबाइल देखता नहीं हूँ, करवाता भी नहीं हूँ। सब छोड़ दिया तो छोड़ दिया। ध्यान का लक्ष्य था, इसी काऱण गृहस्थ जीवन नहीं अपनाया।
अक्षत सागर महाराज कहते हैं कि धर्म को कभी खतरा नहीं है। शिक्षा तंत्र में पाश्चात्य के अनुकरण से धर्म का नाश हो रहा है। संतोषी मां पिक्चर देखकर निकलेगा तो धर्म के प्रति भाव बढ़ेगा लेकिन ओएमजी पिक्चर देखकर निकलेगा तो पूछेगा कि मंदिर क्यों जाऊँ। वह भूल जाता है कि पानी हवा में है लेकिन हवा से पी नहीं सकता। उसी तरह से मंदिर में जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश को असली खतरा चीन से है, ईसाईकरण से है। उन्होंने जैन धर्म, जैन समाज, लव जिहाज, चीन, पाकिस्तान आदि पर खुलकर विचार रखे। देखें ये वीडियो-
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