RSS का वैचारिक शक्ति-केंद्र बना ‘माधव भवन’: बौद्धिक युद्ध के लिए तैयार होगा संघ
भव्य लोकार्पण का ऐतिहासिक अवसर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ब्रज प्रांत के पुनर्निर्मित कार्यालय ‘माधव भवन’ का भव्य लोकार्पण
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
आगरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, ब्रज प्रान्त कार्यालय ‘माधव भवन’ के लोकार्पण कार्यक्रम में अपने आशीर्वचन देते हुए
शारदा पीठाधीवश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज
ने कहा कि संघ पर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रश्नचिन्ह खड़े किये जाते हैं। उन पर बौद्धिक स्तर से उत्तर दिया जाना चाहिए, केवल भावनाओं से काम चलने वाला नही है। उन्होंने आशा प्रकट की यहां पुनर्निर्मित माधव भवन में ऐसी संकाय की व्यवस्था हो, जहां अध्ययनशील कार्यकर्ता समाज को प्रभावी बौद्धिक उत्तर दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे ज्ञानवान कार्यकर्ता ही विधर्मियों को करारा उत्तर दे सकते हैं क्योंकि चिंतन केवल सनातन के पास है। दूसरे धर्म तो अनावश्यक विमर्श खड़ा करने में माहिर हैं।
संघ का युगानुकूल विस्तार
इसी अवसर पर संध के सह सरकार्यवाह
डॉ. कृष्ण गोपाल जी
ने माधव भवन के पुनर्निर्माण पर कहा कि किसी भी संस्था या समाज को युगानुकूल आगे बढ़ना होता है। जब पुराना माधव भवन सन् 1977 में प्रारम्भ हुआ था, तब देश भर में संघ की केवल 8 हजार शाखाएं थीं, जो वर्तमान में 90000 तक पहुंच गयी हैं। अतः कार्यविस्तार और राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर संघ की गुणवत्ता और प्रमाणिकता को और अधिक स्वीकार्यता से आगे बढ़ने के लिए एक बड़े भवन और बड़ी योजना की आवश्यकता थी। उसी की पूर्ति के लिए पुराने माधव भवन का पुनर्निर्माण किया गया है।

सेवा, संस्कार और समाज निर्माण का केंद्र
यहां से संघ की अनेकों गतिविधियां, सेवाकार्य, संस्कार, शिक्षा और स्वास्थ्य के समाज में प्रसार की दृष्टि से भी केन्द्र स्थापित किये जाएंगे, जो संघ की समाज के लिए प्राथमिक जिम्मेदारी के साथ-साथ महत्वपूर्ण भी हैै।
आगरा का गौरवशाली बलिदानी इतिहास
आगरा से जुड़े हिन्दू समाज के महापुरूषों द्वारा किए गये बलिदान के ऐतिहासिक प्रसंगों को स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि आगरा से अपनी बुद्धि-चातुर्य और रणनीतिक कार्यशैली से
छत्रपति शिवाजी
ने औरंगजेब की कैद से मुक्त होकर हिन्दू समाज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा था। उस अविस्मणीय घटना को पूरा विश्व आश्चर्य से देखता है और उनके लिए एक यह शोध का विषय है कि इतनी लम्बी-चौड़ी मुगल सेना एवं सुरक्षा के बन्धन से किस प्रकार शिवाजी अपने पुत्र सहित मुक्त होकर निकल गये। इसी प्रकार उन्होंने फुब्बारा कोतवाली पर हुए
गोकुलाजाट
के बलिदान का भी स्मरण कराया और
फतेहपुरसीकरी में राणा सांगा
द्वारा क्रूर मुगल बादशाह के साथ हुए युद्ध में हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए दी गयी उनके प्राणों की आहुति का स्मरण कराया।
आत्मविस्मृति की पीड़ा
उन्होंने आगे कहा लेकिन हमारे आगरा के लोग इस गौरवशाली इतिहास को भूलते जा रहे हैं। हमारा समाज आत्मविस्मृत हो गया है। आगरा के निकट वृन्दावन, गोकुल, गोवर्धन के भक्ति आंदोलन द्वारा वहां के साधु-संतों और सनातनियों ने जो बलिदान दिया है, हिन्दू धर्म और मंदिरों की रक्षा अपने प्राणों पर खेलकर की थी, उसे भी हम लोग समाज के समक्ष प्रभावशाली ढ़ंग से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं।

शोध, स्वाध्याय और दस्तावेजीकरण की अपेक्षा
उन्होंने आशा प्रकट की कि यह पुनर्निर्मित माधव भवन में ऐसी स्वाध्याय और शोध की व्यवस्था होगी जो उस काल खण्ड के दस्तावेजों को सुरक्षित करते हुए वर्तमान समाज के सामने हजारों वर्षों में हमारे हिन्दू समाज द्वारा जो बलिदान किया गया है, उस गौरवशाली इतिहास को बाहर निकालने का काम करेगा।
स्मारक और म्यूजियम का सुझाव
उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को सुझाव दिया कि शिवाजी महाराज, गोकुलाजाट एवं राणा सांगा के बलिदान स्थल पर उनके स्मारक और म्यूजियम निर्माण का कार्य प्रारम्भ करना चाहिए जिससे बाहर से आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को ताजमहल के साथ-साथ हमारे गौरवशाली इतिहास जानने का भी अवसर प्राप्त हो सके।
विशिष्ट उपस्थिति और समापन
इस अवसर पर अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख रामलाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, अखिल भारतीय गौ संयोजक अजीत महापात्रा, अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद, अखिल भारतीय सह संयोजक पर्यावरण गतिविधि राकेश जैन, दिनेश उपाध्याय विश्व हिन्दू परिषद्, क्षेत्र प्रचारक महेन्द्र, क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य मनीराम, सुरेशचन्द्र एवं गंगाराम, संस्कार भारती- बांकेलाल, क्षेत्र संगठन मंत्री बिहार विद्या भारती ख्यालीराम, प्रान्त कार्यवाह राजकुमार, प्रान्त प्रचारक प्रमुख प्रीतम सिंह, प्रान्त प्रचारक धर्मेन्द्र, सह प्रान्त प्रचारक विनोद, प्रांत व्यवस्था प्रमुख दिलीप, प्रान्त सेवा प्रमुख मदनलाल, सह प्रान्त सेवा प्रमुख चन्दन एवं पंकज खण्डेवाल, प्रान्त सम्पर्क प्रमुख प्रमोद चौहान, प्रान्त प्रचार प्रमुख कीर्ति कुमार, सह प्रान्त प्रचार प्रमुख मनोहर निरंकारी, भाजपा उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेकों वरिष्ठ प्रचारक, भाजपा के मंत्री, सांसद, विधायकों सहित शहर के अनेकों गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशान्त गुप्ता ने एवं धन्यवाद ज्ञापन विजय गोयल ने किया। वन्दे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
संपादकीय
माधव भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की वैचारिक प्रयोगशाला है।
आज के समय में जब भारत की संस्कृति, परंपरा और सनातन चिंतन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए जा रहे हैं, तब संघ द्वारा बौद्धिक उत्तर देने की आवश्यकता को रेखांकित करना अत्यंत दूरदर्शी कदम है।
संघ की यात्रा 8 हजार शाखाओं से 90 हजार शाखाओं तक केवल संख्या का विस्तार नहीं है, यह समाज के विश्वास, स्वीकार्यता और राष्ट्र की आत्मा से जुड़ाव का प्रमाण है। माधव भवन उसी विस्तार का प्रतीक है, जो परंपरा के मूल को छोड़े बिना आधुनिक चुनौतियों का सामना करेगा।
आगरा की धरती केवल ताजमहल तक सीमित नहीं है। यह वही भूमि है जहाँ से छत्रपति शिवाजी ने मुगल सत्ता को चुनौती दी, जहाँ गोकुला जाट ने अपने प्राणों की आहुति दी और जहाँ राणा सांगा ने धर्म रक्षा के लिए रणभूमि को पवित्र किया। यदि यह इतिहास विस्मृत हो गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ आत्मविहीन हो जाएँगी।
माधव भवन में शोध, स्वाध्याय और दस्तावेजीकरण की जो परिकल्पना रखी गई है, वह केवल अतीत को सहेजने का कार्य नहीं करेगी, बल्कि भविष्य को वैचारिक रूप से सशक्त बनाएगी। स्मारक और म्यूजियम निर्माण का सुझाव राष्ट्रबोध को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है।
यह भवन संघ का कार्यालय नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को जगाने वाला केंद्र बने — यही इस लोकार्पण का वास्तविक संदेश है।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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