ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में प्रशासन और प्राधिकरण की कथित लापरवाही एक बार फिर काल बन गई है। दलेलगढ़ गांव में अपने मामा के घर धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने आए 3 साल के मासूम देवांश की पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना शनिवार दोपहर की है, जब देवांश घर के बाहर खेलते समय अचानक 7 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा।
भंडारे की खुशियां मातम में बदलीं
सिकंदराबाद के सपौनी निवासी राकेश का बेटा देवांश अपनी मां अंजली के साथ दलेलगढ़ आया था। यहाँ उसके मामा देवेंद्र द्वारा आयोजित 41 दिवसीय अनुष्ठान का आखिरी दिन था और भंडारा चल रहा था। इसी दौरान देवांश खेलते-खेलते लापता हो गया। काफी तलाश के बाद जब समाधि स्थल के पास स्थित गड्ढे में बच्चे की टोपी तैरती दिखी, तो हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने बच्चे को बाहर निकाला और अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
प्राधिकरण और ग्रामीणों के बीच जमीन पर विवाद
हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह गड्ढा ‘पशुचर’ (सरकारी) भूमि पर है, जहाँ से अवैध रूप से मिट्टी निकालने के कारण गहरा गड्ढा बन गया था।
उन्होंने कई बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से इसकी तारबंदी की मांग की थी, जिसे अनसुना कर दिया गया। वहीं, प्राधिकरण के जीएम ए.के. सिंह का दावा है कि यह जमीन निजी (किसानों की) है, इसलिए प्राधिकरण सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
फिलहाल पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन इस घटना ने दिल्ली-एनसीआर में खुले पड़े गड्ढों और सरकारी तंत्र की सुस्ती पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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