किसी दूसरे इंसान से नजदीकी, उससे जुड़ाव महसूस होने की फीलिंग ही इंटिमेसी कहलाती है। यही फीलिंग रिलेशनशिप में प्यार घोलती है, रिश्तों को मजबूत करती है। यह फीलिंग जितनी ज्यादा होती है, रिश्ते भी उतने ही गहरे होते हैं। अंतरंग रिश्तों की अतरंगी बातें इंटिमेसी बढ़ाती हैं।
समाज इंटिमेसी शब्द का मतलब ही गलत निकालता है। इंटिमेसी बेडरूम से नहीं, बल्कि बेडरूम के बाहर शुरू होती है। जब आप पार्टनर के अचानक से बाल संवारें या उसको हग कर लें, उसकी पीठ थपथपाएं या उनके गालों को सहलाएं, इस तरह की बॉडी लैंग्वेज इंटिमेसी को दर्शाती है।
रिसर्चगेट पर मौजूद रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया में करीब 30 से 40 फीसदी लोग ऐसी मानसिक उलझनों से घिरे रहते हैं और दिल की बात कह नहीं पाते। ऐसे लोगों की चाहत और प्यार उनके दिल में ही दबा रह जाता है। वे चाहकर भी किसी का हाथ थामने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। इसे ‘फिअर ऑफ इंटिमेसी’ कहा जाता है।
‘फिअर ऑफ इंटिमेसी’ यानी किसी के करीब जाने का डर, अंतरंग संबंध बनाने से घबराहट। यह समस्या टीनएजर्स या यंग कपल में ही देखने को नहीं मिलती बल्कि शादीशुदा कपल्स भी इस मुश्किल से जूझ रहे हैं।
यह डर बढ़ने पर इंटिमेसी एंग्जाइटी डिसऑर्डर, सोशल फोबिया और अवॉइडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर में बदल जाता है। इस प्रॉब्लम को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो लोगों का घुलना-मिलना कम होता जाता है। कुछ तो इस डर के कारण रिलेशनशिप से बचते हैं या फिर कभी शादी नहीं करते।
– एजेंसी
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