आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा दौरे से ठीक पहले प्रशासन द्वारा प्रमुख किसान नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिए जाने से हड़कंप मच गया। इनर रिंग रोड परियोजना के मुआवजे और आगरा कोऑपरेटिव बैंक में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने की योजना बना रहे किसान नेताओं को पुलिस ने रोक दिया।
क्या है इनर रिंग रोड का विवाद?
किसान नेता श्याम सिंह चाहर, मुकेश पाठक, लाखन सिंह त्यागी समेत अन्य ने बताया कि वे इनर रिंग रोड लैंड पार्सल (तृतीय चरण) के तहत रोहता, पंचगाई पट्टी, इटौरा और जाखोदा गांवों के किसानों के लिए न्याय मांगने निकले थे। किसानों का आरोप है कि पिछले 16 वर्षों से उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही उनकी भूमि वापस की गई है।
उन्होंने मांग की कि या तो अधिग्रहित भूमि वापस की जाए या वर्तमान बाजार भाव का चार गुना मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि एडीए अधिकारी तथ्यों को छिपा रहे हैं और वहां बसी आबादी की वास्तविकता को नजरअंदाज कर रहे हैं।
कोऑपरेटिव बैंक की वित्तीय सेहत पर गंभीर सवाल
नजरबंद किए गए किसान नेताओं ने आगरा कोऑपरेटिव बैंक (मुख्य शाखा, नाई की मंडी) में भारी वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है। श्याम सिंह चाहर ने दावा किया कि वर्ष 2024-25 में लाभ में रहने वाली बैंक, अचानक 2025-26 में लगभग 10 करोड़ रुपये के घाटे में कैसे चली गई, इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि कोऑपरेटिव बैंक के तीन वर्षों में छह-छह बोर्ड बैठकें आयोजित हुईं, यानी कुल 18 बैठकें हुईं। इन बैठकों में चेयरमैन सहित 216 सदस्यों पर लगभग 49 लाख रुपये के खान-पान का खर्च दर्शाया गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैंक की मुख्य शाखा सहित 16 शाखाओं में तीन वर्षों के दौरान पेयजल पर लगभग 2.31 लाख रुपये खर्च दर्शाया गया, जबकि संबंधित बिल और वाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए।
इसके अलावा मुख्य शाखा सहित 16 शाखाओं में अतिथि सत्कार पर लगभग 2 करोड़ 68 लाख रुपये तथा छपाई एवं प्रचार-प्रसार पर लगभग 1 करोड़ 99 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं। उनका आरोप है कि जांच रिपोर्ट में इन खर्चों के बिल और वाउचर नहीं दर्शाए गए तथा यह भी स्पष्ट नहीं है कि भुगतान नगद हुआ या चेक के माध्यम से। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में अभी और भी खुलासे होंगे।
प्रशासन की कार्यशैली पर बढ़ा असंतोष
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल मुआवजे का मुद्दा नहीं, बल्कि सरकारी धन की बर्बादी और भ्रष्टाचार का मामला है। उन्होंने एडीए और बैंक के दोषी अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। हालांकि, प्रशासन ने फिलहाल कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए नेताओं को नजरबंद कर दिया है, लेकिन किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे।
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