हर वर्ष सकारात्मक सोच से शुरू किया जाता है| बीते हुए वर्ष को हुई परेशानियां या गलतियां अनचाहे समस्या का सामना ना करना पड़े, ऐसी प्रभु से कामना करते हुए एक अच्छे नववर्ष की शुरुआत हर वर्ष की तरह मैंने भी 2020 में की थी| आपको ज्ञात होगा 24 जुलाई 2019 को मेरा एक्सीडेंट हो गया था| पैर में चोट लगने के कारण मैं बेड रेस्ट पर रहा परंतु नए साल 2020 के आगमन और उत्साह में मैंने दोबारा अपना जीवन सामान्य करना शुरु किया और जब जीवन को सुचारू रूप से ला ही रहा था, ऐसे में कोविड-19 जैसी महामारी ने एक बार फिर मुझे क्या पूरे संसार को ही घरों में कैद कर दिया| जो जहां था वहां रह गया|भय का इतना बड़ा आतंक हो गया कि लोग घरों में भी आपस में दूरी रखने लगे| मुंह पर मास्क लगाने लगे| हाथ धोने लगे| बाहर से घर में आने वाली वस्तु को, व्यक्ति को, हवा तक को एक टाइम बम के रूप में देखा जाने लगा| दुनिया भर के लोगों के मन में तमाम सवाल उत्पन्न होने लगे| तमाम समाजसेवियों, डॉक्टरों की टीम, अखबारों की टीम, आम आदमी के प्रश्नों का खोज-खोज के उत्तर देने लगी।पूरे विश्व को नए-नए अनुभव होने लगे| लोग वैज्ञानिक दुनिया से प्राकृतिक दुनिया में पदार्पण करने लगे| अनेक प्रकार के अनुभवों के बीच में मैंने भी अपने आप को स्वस्थ रखना, प्रसन्न रहना, व्यस्त रहना सीख लिया था। तमाम लोगों को अनेक अनुभव हुए| जहां एक तरफ पूरे विश्व की हर प्रकार की आर्थिक, व्यापारिक, चिकित्सक सेवा बंद होने से जनजीवन बिल्कुल ठप हो गया था, तो दूसरी तरफ सकारात्मक सोच का जन्म हुआ। लोगों को परिवार के साथ जोड़ना, एक दूसरे से बात करना था, जो दो दशक से भारत में भी इसका अभाव देखा जा रहा था।
हर घर में हर व्यक्ति के अंदर छुपी प्रतिभा के अंकुर को जन्म दिया। प्रतिभाओं के साथ सभी ने समय का न केवल सदुपयोग किया बल्कि प्रतिभाओं से वह प्रफुल्लित हुआ| उससे उसने अपनी इम्युनिटी सिस्टम बढ़ाया| रिश्तेदारों से टेलीफोन पर वार्तालाप कई-कई घंटे करके अपने रिश्तों को दोबारा प्रगाढ़ किया| आज पेंटिंग, क्राफ्ट, लेखन, इंटरनेट सीखना, टेलरिंग, व्हाट्सएप, कहानी लिखना, बाग़वानी, बच्चों को पढ़ाना, बच्चों के साथ सांप-सीढ़ी, लूडो, चेस, अंताक्षरी आदि को खेलना जो हमारी पीढ़ी के लिए एक बार फिर किसी नए उत्साह से कम नहीं था| मैंने भी इस लॉकडाउन के दौरान अपनी भावनाओं को कागज पर उतारना शुरू किया| जो आज लेखन एक आदत क्या नशा हो गया है| अगर मैं किसी दिन के लिए भी कुछ ना लिखूं तो मुझे ऐसा लगता है कि मैंने आज दिन में कुछ नहीं किया| मेरे लिखने की शक्ति और सभी ग्राहकों और रिश्तेदारों से टेलीफोन पर बात करने से मुझे आज तक यह नहीं पता चला कि मेरा समय कहाँ गया| आम जिंदगी से भी ज्यादा मैं व्यस्त था, स्वास्थ था और मानसिक रूप से मजबूत था|
कोरोना महामारी-2020 में मुझे एक सबक मिला कि अगर आप सकारात्मक सोचेंगे, व्यस्त रहेंगे, मस्त रहेंगे, लोगों से बात करते रहेंगे, अपनी भावनाओं को चाहे पेंटिंग में, चाहे लेखन में, चाहे किसी अन्य प्रकार के कार्य से रुबरू होते रहेंगे तो आपका मानसिक द्वंद एक सकारात्मक शक्ति में परिवर्तित होकर आपको उत्साहित व प्रफुल्लित करेगा। लेख लिखते वक्त मुझे बड़ी परेशानी आ रही थी| एक लेख में काफी समय लग जाता था| किसी लेख में तो 2 दिन लग जाता था क्योंकि पहले रोमन में टाइप करो फिर उसे करेक्ट करो |तब हमारे बच्चों द्वारा हमको सितंबर माह में एक मोबाइल दिया गया जिसमें बोलने से टाइप हो जाता है| इसके आने के बाद तो हमारे पंख लग गए| आज हम फुर्ती से इस पर लिख कर एडिट कर लेखन के द्वारा आप सभी का आशीर्वाद पा रहा हूँ| यह मेरे लिए 2020 की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है| वर्षों से मेरी दबी हुई इच्छा थी उसको मैंने प्रभु की असीम अनुकंपा और सरस्वती जी की आशीर्वाद से दिन प्रतिदिन बेहतरी की तरफ अग्रसर किया| तमाम मेरे शुभ चिंतक मेरे लेखन में सहायता कर रहे हैं| भारतवर्ष के अनेक प्रबुद्ध साहित्यकार मेरे लेखन को ना केवल ठीक कराते हैं बल्कि अगर कोई चीज बहुत अच्छी होती है तो उसके लिए वह मुझे प्रोत्साहित भी करते हैं| जिस प्रकार 2020 में मैंने अपने आप को व्यस्त रहना, मस्त रहना, कम खाना ,स्वास्थ्य के प्रति चिंतन करना, लेख लिखना, वेब मीटिंग पर दुनियाभर की मीटिंग अटेंड करके अपने ज्ञान को बढ़ाना, रिश्तों जीवित करना यह सब 2020 की मेरी उपलब्धि है|
यह बात ठीक है कि इस उपलब्धि में कहीं ना कहीं आर्थिक रूप से नुकसान हुआ है, पर वह नुकसान आर्थिक रूप का नुकसान कभी भी किसी भी समय भरा जा सकता है, लेकिन छिपी हुई प्रतिभा का निकलना, आत्म संतोष, मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक संबल प्राप्त करना जीवन का सबसे बड़ा लाभ है| मुझे लगता है संसार में मेरे जैसे अनेक लोग होंगे जिन्होंने मेरे से सौ गुना अपने जीवन में न केवल परिवर्तन किया होगा बल्कि अपनी प्रतिभाओं को अपनी सामाजिक सेवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदारियों को परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को बहुत अच्छे से समझा होगा और उसे पूर्ण निभाने में सक्षम हुआ| 2020 में एक उपलब्धि प्रतिभाओं का उभरना, स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना, परिवार के प्रति प्यार बढ़ाने और समाज के प्रति सामाजिक रुख रखने के साथ-साथ अब आर्थिक रूप से भी लोग उतने ज्यादा लालची और लोभी नहीं रहे हैं जितने पहले थे| आज 2020 में वह साफ सुथरा नकद का व्यापार करने का व सीमित व्यापार करने के लिए अग्रसित हुए हैं, कारण क्या है कि उन्हें भी लगता है कि जितनी कम आवश्यकताएं होंगी उतना ही जीवन उल्लासपूर्वक होगा। यहाँ मै गोल्डन एज के अपने सदस्यों शुक्रिया ज़रूर अदा करूँगा। उनके मार्गदर्शन ने मुझे आगरा का इतिहास, वेद पुराण की बात बतायी। साथ ही मुझे कोविड-१९ के लिए लिखने को प्रेरित किया, जिसका काम चालू है, बहुत जल्द आपके हाथ में किताब होगी।
मेरा मानना है- जिसने दिया तन को वो देगा कफन को। जी हाँ कोई ईश्वरी शक्ति थी जो कोरोना महामारी में भी भारत के लोगों का जीवन सामान्य व स्वस्थ रखा। वह सदियों तक याद रहेगी। न केवल याद रहेगी बल्कि 22 मार्च से लेकर 30 मई 2020 तक का समय मेरे जीवन का एक इतिहास के रूप में लिख गया है | गुजरते साल के साथ थोड़ा मैं भी गुजरा हूं, बिखर के टुकडा़ सा हुआ अब नया सा निखरा हूँ |
-राजीव गुप्ता जनस्नेही
फोन नम्बर 9837097850
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