प्रयागराज विवाद पर बोले द्वारका पीठाधीश्वर: गंगा स्नान से रोकना गौहत्या के समान पाप…सत्ता का अहंकार न करे प्रशासन

RELIGION/ CULTURE

नागपुर। प्रयागराज माघ मेला 2026 में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर हुए विवाद पर अब द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। नागपुर प्रवास के दौरान एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में हुई घटना की घोर निंदा करते हुए प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।

शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने कहा कि मौनी अमावस्या स्नान के दौरान बटुक ब्राह्मणों और साधु-संतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के कुछ कर्मचारियों और पुलिस ने चोटी पकड़कर बटुकों को घसीटा, जो बेहद निंदनीय है।

“शिखा का अपमान नहीं किया जा सकता”

स्वामी सदानन्द सरस्वती ने कहा कि शिखा (चोटी) का धार्मिक महत्व समझे बिना ऐसा कृत्य किया गया। उन्होंने कहा, “ये लोग शिखा का अर्थ नहीं जानते, धर्म का अर्थ नहीं जानते। शिखा जहां होती है, वहां ब्रह्मरंध्र होता है। ब्रह्मरंध्र का अपमान नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने आगे कहा कि साधना और आध्यात्मिक परंपरा में ब्रह्मरंध्र का विशेष महत्व है और इस तरह की कार्रवाई धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है।

“गंगा स्नान से रोकना गौहत्या के पाप के बराबर”

शंकराचार्य ने प्रशासन पर सत्ता के अहंकार में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता हमेशा नहीं रहती, इसलिए उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यक्ति गंगा स्नान करने वालों के मार्ग में बाधा डालता है, उसे गौहत्या के समान पाप लगता है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी को बल, शक्ति और अधिकार मिला है तो उसका इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए, न कि धार्मिक आस्था को रोकने में।

अविमुक्तेश्वरानंद का मामला अभी भी गरम

गौरतलब है कि प्रयागराज माघ मेला 2026 में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर पालकी के साथ संगम की ओर जाने से रोके जाने के बाद मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। इस दौरान पुलिस और उनके अनुयायियों के बीच धक्का-मुक्की हुई थी और कई साधु-संतों के घायल होने की भी बात सामने आई थी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस घटना के लिए प्रयागराज पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार को जिम्मेदार ठहराया था।

वायरल वीडियो और नोटिस ने बढ़ाया विवाद

घटना से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें आरोप है कि पुलिस कर्मी साधु-संतों के साथ जबरदस्ती करते और जटा पकड़कर घसीटते नजर आ रहे हैं।
इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर धरना भी दिया, जहां कई साधु-संत और कंप्यूटर बाबा समेत अन्य लोग पहुंचे। वहीं मेला प्रशासन की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया, जिस पर उन्होंने लीगल एक्शन लेने की बात कही है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की व्याख्या को “तोड़-मरोड़ कर” उन्हें नोटिस दिया गया है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर बढ़ती नाराजगी

द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती के बयान के बाद यह मामला अब और गंभीर होता दिख रहा है। संत समाज के एक बड़े वर्ग में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है और इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।

Dr. Bhanu Pratap Singh