1500 चिकित्सकों की मौजूदगी में अयोध्या में सम्मानित हुए आगरा के डॉ बीके अग्रवाल, मिला डायबिटीज एडवोकेसी अवार्ड

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आगरा के सुप्रसिद्ध फिजिशियन डॉ बी.के. अग्रवाल को डायबिटीज एडवोकेसी अवार्ड, 1500 चिकित्सकों के बीच अयोध्या में हुआ सम्मान

अंतरराष्ट्रीय मधुमेह कार्यशाला में मिला सम्मान

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आगराResearch Society for the Study of Diabetes in India (RSSDI Uttar Pradesh) की ओर से

अयोध्या में 13 से 15 मार्च तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय मधुमेह कार्यशाला में आगरा के सुप्रसिद्ध फिजिशियन और आगरा विकास मंच के मेडिकल प्रकोष्ठ के प्रमुख
डॉ बी.के. अग्रवाल को डायबिटीज एडवोकेसी अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 1500 चिकित्सकों ने भाग लिया और मधुमेह से जुड़ी नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों, उपचार और बचाव के उपायों पर चर्चा की गई।

चंपत राय ने प्रदान किया सम्मान

सम्मान समारोह में चंपत राय, जो
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री हैं, ने
डॉ बी.के. अग्रवाल को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।
कार्यक्रम में मधुमेह की बढ़ती चुनौती, उससे बचाव के उपाय और समाज में जागरूकता की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

आगरा के लिए गर्व का विषय

आगरा विकास मंच के अध्यक्ष राजकुमार जैन और संयोजक
सुनील कुमार जैन ने कहा कि
डॉ बी.के. अग्रवाल को मिला यह सम्मान पूरे
आगरा शहर के लिए गौरव का क्षण है।
उन्होंने कहा कि आगरा विकास मंच के मेडिकल प्रकोष्ठ के माध्यम से समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और डॉ अग्रवाल का मार्गदर्शन इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डायबिटीज जागरूकता के लिए लगातार प्रयास

आगरा विकास मंच के मेडिकल प्रकोष्ठ के संरक्षक के रूप में
डॉ बी.के. अग्रवाल लंबे समय से मधुमेह के प्रति जनजागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों, स्वास्थ्य शिविरों और परामर्श अभियानों का संचालन करते आ रहे हैं।
उनका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि
सही खानपान, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच के माध्यम से मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है।

शहर के गणमान्यों ने दी बधाई

सुशील जैन,
संदेश जैन,
डॉ सुनील शर्मा,
डॉ रमेश धमीजा,
डॉ विजय कत्याल,
डॉ अरुण जैन,
जय रामदास,
ध्रुव जैन,
विजय सेठिया,
महेंद्र जैन और
राकेश जैन सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने
डॉ बी.के. अग्रवाल की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी और इसे आगरा की चिकित्सा सेवा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

संपादकीय

आज के दौर में मधुमेह केवल एक बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक जीवनशैली से जुड़ी गंभीर चुनौती बन चुकी है।
भारत को अक्सर “डायबिटीज की राजधानी” कहा जाने लगा है, क्योंकि तेजी से बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है।
ऐसे समय में जब समाज को जागरूक करने वाले चिकित्सकों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, तब
डॉ बी.के. अग्रवाल जैसे चिकित्सकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

डायबिटीज का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है और व्यक्ति को तब पता चलता है जब कई जटिलताएँ पैदा हो चुकी होती हैं।
हृदय रोग, किडनी की समस्या, आंखों की कमजोरी और नसों की क्षति जैसे गंभीर परिणाम मधुमेह से जुड़े होते हैं।
इसलिए आज सबसे बड़ी जरूरत इलाज से पहले जागरूकता और बचाव की है।

डॉ बी.के. अग्रवाल लंबे समय से आगरा में मधुमेह के प्रति जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं।
उनके प्रयास केवल क्लीनिक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के बीच जाकर लोगों को सही जानकारी देने, जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
यही कारण है कि उन्हें मिला डायबिटीज एडवोकेसी अवार्ड केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक सोच का सम्मान है जो स्वास्थ्य को सबसे बड़ी प्राथमिकता मानती है।

समाज को भी यह समझना होगा कि डॉक्टर अकेले इस लड़ाई को नहीं जीत सकते। हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में सुधार करना होगा।
नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, समय पर जांच और तनाव से दूरी — ये चार सूत्र मधुमेह से बचाव के सबसे बड़े हथियार हैं।

आज आवश्यकता है कि स्कूलों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के माध्यम से
स्वास्थ्य जागरूकता को जनआंदोलन बनाया जाए।
जब समाज स्वयं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होगा, तभी हम मधुमेह जैसी बीमारियों को नियंत्रित कर पाएंगे।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

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