परिषदीय विद्यालयों में शासन के निर्देशानुसार रोस्टर प्रणाली लागू करते हुए बच्चे विद्यालयों में आ रहे हैं, किन्तु सप्ताह में एक या दो दिन आने से पूरी तरह पढ़ाई नहीं हो पा रही है। वहीं शिक्षकों द्वारा छात्रों को रोस्टर प्रणाली से बुलाने पर बहुत ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, कभी बच्चे आते ही नहीं, कभी बच्चे 50% से ज्यादा आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में विद्यालय का स्टाफ छात्रों को व्यवस्थित करने में लगा रहता है । इसलिए शिक्षण कार्य में बहुत तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
जहां स्टाफ मानक अनुसार हैं वहां तो व्यवस्था बन जाती है लेकिन बात करते हैं नगर क्षेत्र के विद्यालयों की तो यहां पर शिक्षकों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों को छात्र -छात्राओं को व्यवस्था के अनुसार बुलाने के साथ साथ कोविड-19 के सभी मानकों को भी पूरा करना है। एमडीएम की व्यवस्था भी देखनी है, कार्यालय के कार्य भी करने हैं इस कारण से शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। इसके साथ-साथ सभी शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण करने के लिए पूरा पूरा दिन प्रशिक्षण में गुजारना पड़ता है। 31 मार्च तक एक-एक शिक्षक को 25- 25 प्रशिक्षण करने हैं। व्यवस्था पूर्ण रूप से व्यवस्थित नहीं हो पा रही है ।
सत्र व्यवस्थित करने के लिए अति शीघ्र शासन को व्यवस्था बनानी पड़ेगी। जहां शिक्षक नहीं है वहां पर्याप्त मात्र में शिक्षक देने होंगे। ऑनलाइन प्रशिक्षणों को बंद किया जाना चाहिए, जिससे शिक्षक अपना ध्यान सिर्फ छात्रों को पढ़ाने में ही लगा सके। इससे शिक्षा का स्तर सुधरेगा। इसके साथ साथ शिक्षकों में कार्यवाही का भय बना रहता है। भय के कारण शिक्षक पूरी तरह से दबाव में रहते हैं। जब तक कार्यवाही एवं भय का माहौल शिक्षकों के मस्तिष्क में रहेगा, शिक्षक अपनी क्षमता का प्रदर्शन पूरी तरह नहीं कर पाएंगे। अतः शिक्षकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो शिक्षा के स्तर में बहुत ज्यादा सुधार आएगा।
राजीव वर्मा, जिला महामंत्री, यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा), जनपद आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत
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