आगरा में गूंजा श्रीमद्भागवत का जयघोष: सुदामा चरित्र सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु, अंतिम दिन हुआ दिव्य वर्णन

RELIGION/ CULTURE

आगरा। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर वजीरपुर स्थित प्राचीन सीताराम मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा रविवार को अपने समापन की ओर अग्रसर हुई। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र, द्वारिका लीला और परीक्षित मोक्ष के मार्मिक प्रसंगों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

सुदामा चरित्र: भक्ति और मित्रता का सर्वोच्च आदर्श

कथा व्यास भागवताचार्य श्री चैतन्य हरिचरत जी महाराज ने श्रीकृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्री हरि केवल ‘भाव’ के भूखे होते हैं। सुदामा के पास अर्पित करने के लिए केवल मुट्ठी भर चावल थे, परंतु उनकी निष्काम भक्ति और प्रेम ने भगवान को द्रवित कर दिया। महाराज श्री ने कहा, “भगवान श्रीकृष्ण ने राजा होकर भी जिस आत्मीयता से अपने निर्धन मित्र सुदामा का आलिंगन किया, वह संसार के लिए मित्रता और मानवता का सर्वोच्च आदर्श है। सच्चा मित्र वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मित्र का सम्मान न खोने दे।”

परीक्षित मोक्ष का संदेश

महाराज श्री ने परीक्षित मोक्ष प्रसंग सुनाते हुए मानव जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है, जिसे धर्म, भक्ति और सत्कर्मों में व्यतीत करना चाहिए। श्रीमद्भागवत का श्रवण मात्र मनुष्य को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है और जीवन को सार्थक बनाता है।

​यजमान और संयोजकों की भूमिका

कथा के मुख्य यजमान निरंजन लाल सारस्वत एवं आशा सारस्वत ने व्यासपीठ का पूजन कर धर्म लाभ प्राप्त किया। मंदिर के महंत अनंत उपाध्याय एवं कार्यक्रम संयोजक मनीष अग्रवाल ने बताया कि सोमवार प्रातः 8 बजे से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन और पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। तत्पश्चात, सायं श्री खाटू श्याम जी की भजन संध्या के साथ इस सात दिवसीय महामहोत्सव का विधिवत समापन होगा।

​भक्तों की उपस्थिति

इस पुनीत अवसर पर गोपी गुरु, शकुन बंसल, पार्षद मुरारी लाल गोयल, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, मुकेश शर्मा, आयुष उपाध्याय, पंकज शास्त्री, विकास शर्मा, सुमन सुराना, विजय रोहतगी, अरविंद गुप्ता, अतुल गुप्ता, मनोज कुमार गुप्ता और मनोज बंसल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी भक्तों ने कथा के अंत में भावपूर्ण तरीके से हरि नाम संकीर्तन का आनंद लिया।

Dr. Bhanu Pratap Singh