Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। वृंदावन के ठा. बांकेबिहारी मंदिर को दोबारा अनिश्चित काल के लिए बंद किये जाने का मामला अब न्यायालय में पहुंच गया है। ज्ञात रहे कि 17 अक्टूबर यानी नवरात्रों की शुरूआत के साथही सात महीने बाद विश्व प्रसिद्ध मंदिर ठा.बांकेबिहारी को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। शनिवार ओर रविवार को दो दिन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए कुछ कठिन शर्तों के साथा खोला गया। इस दौरान जिला प्रशासन के साथ मंदिर प्रबंधन द्वारा तय की गईं शर्तों का किसी स्तर पर पालन नहीं हुआ। इसके बाद 19 अक्टूबर से दोबारा मंदिर को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया। अब इस मामले में हिमांशु गोस्वामी ने सिविल जज जूनियर डिवीजन के यहां याचिका दाखिल की है। याचिका में मंदिर को खोले जाने की मांग की गई है। इस याचिका पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है।
पहले ही दिन करीब 20 हजार लोग वृंदावन पहुंचे, लोगों ने रात तक दर्शन किए
मंदिर प्रबंधन के साथ जिला प्रशासन की बैठक में तय हुआ था कि प्रतिदिन 400 श्रद्धालु ही दर्शन कर सकेंगे। फिलहाल इसके लिए उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। हर घंटे में मंदिर परिसर को सैनिटाइज किया जाएगा। श्रद्धालुओं का प्रवेश तीन नम्बर द्वार से, निकासी 4 नम्बर द्वार से होगी। सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए अतिरिक्त पुलिस लगेगी। श्रद्धालु प्रातः 8 बजे से 12 बजे तक, शाम 5.30 बजे से 9.30 बजे तक दर्शन कर सकेंगे। श्रीबांकेबिहारी मंदिर की वेबसाइट पर भक्तों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पहले ही दिन करीब 20 हजार लोग वृंदावन पहुंचे, जिनमें से अधिकांश लोगों ने रात तक दर्शन किए। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू होने के बाद ही मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खुलेंगे। मंदिर में ठाकुर जी की पूजा-अर्चना सेवायत करते रहेंगे।
अत्यधिक लोड हो जाने के कारण ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी
प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया कि कोविड-19 की गृह मंत्रालय द्वारा जारी गाइड लाइन के तहत ही बांकेबिहारी मंदिर खोला गया, लेकिन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अत्यधिक लोड हो जाने के कारण ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी।
न्यायालय से दर्शन के लिए मंदिर खुलवाने और प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है
याचिकाकर्ता हिमांशु गोस्वामी ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर श्रीबांकेबिहारी मंदिर को खोला गया था, लेकिन अब बगैर न्यायालय की सहमति लिए मंदिर को प्रबंधक ने बंद कर दिया है। यह मनमानी है, मंदिर के बाहर भीड़ को नियंत्रित करने का दायित्व पुलिस प्रशासन का है, जो इस व्यवस्था में नाकाम रहे हैं। अब न्यायालय से दर्शन के लिए मंदिर खुलवाने और प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
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