आगरा: विज्ञान और तकनीक के संगम से अब रसायनों की दुनिया बदलने वाली है। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) के रसायन विज्ञान विभाग ने अनुसंधान और शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल कर एक क्रांतिकारी पहल की है।
एआई की मदद से अब अणुओं के गुणों की भविष्यवाणी, जटिल रासायनिक अभिक्रियाओं का विश्लेषण और नई औषधियों की खोज पहले से कहीं अधिक सटीक, तेज और किफायती हो गई है।
मशीन लर्निंग से नवाचार की नई गति
मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों ने स्पेक्ट्रोस्कोपिक परिणामों और संरचनात्मक विश्लेषण को समझना बेहद सरल बना दिया है। स्वचालित प्रयोगशालाएं और कंप्यूटर-आधारित मॉडलिंग अब अनुसंधान के समय और संसाधनों की बचत कर रही हैं।
एआई की इसी महत्ता को देखते हुए वर्ष 2024 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार भी एआई-आधारित ‘AlphaFold’ प्रणाली विकसित करने वाले वैज्ञानिकों को दिया गया है, जो प्रोटीन संरचनाओं की सटीक भविष्यवाणी करती है।
डीईआई में शोधार्थियों के लिए विशेष वातावरण
डीईआई का रसायन विज्ञान विभाग अपने छात्रों और शोधार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है। विभाग द्वारा आयोजित सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से छात्रों को कंप्यूटेशनल केमिस्ट्री और डेटा-आधारित अध्ययन से जोड़ा जा रहा है।
संस्थान का लक्ष्य एक ऐसा अंतःविषय (Interdisciplinary) दृष्टिकोण विकसित करना है, जिससे विद्यार्थी वैश्विक वैज्ञानिक परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभा सकें।
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