लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। सूबे की सियासत में एक बार फिर भारी हलचल है, क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच मैराथन बैठकों का दौर जारी है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह की शुरुआत में ही योगी मंत्रिमंडल का विस्तार (Yogi Cabinet Expansion) संभव है। इस फेरबदल के जरिए भाजपा क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी तैयारी में है।
कोर कमेटी की बैठक और आरएसएस का दखल
आज दोपहर बाद होने वाली भाजपा कोर कमेटी की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक में आरएसएस के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी शामिल होंगे। अरुण कुमार की दो महत्वपूर्ण बैठकों में उपस्थिति स्पष्ट संकेत दे रही है कि संघ और संगठन मिलकर आगामी चुनाव के लिए एक ऐसी टीम तैयार करना चाहते हैं, जिसमें सरकार और संगठन का बेहतर तालमेल हो।
इन चेहरों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
सियासी गलियारों में चर्चा है कि सरकार के कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है, जबकि संगठन के अनुभवी चेहरों को कैबिनेट में जगह दी जाएगी। संभावित नामों में ये प्रमुख हैं:
भूपेंद्र सिंह चौधरी: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है।
अशोक कटारिया: इनके भी मंत्रिमंडल में शामिल होने की प्रबल चर्चा है।
पूजा पाल: नए चेहरे के रूप में महिला और पिछड़ा वर्ग समीकरण के तहत जगह मिल सकती है।
बलदेव सिंह औलख: वर्तमान राज्यमंत्री का कद बढ़ाकर उन्हें कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार का प्रमोशन मिल सकता है।
गोविंद नारायण शुक्ला: एमएलसी और प्रदेश महामंत्री को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है।
उत्तराखंड में विस्तार के बाद यूपी पर नजर
भाजपा ने चुनावी राज्यों में फेरबदल की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी कड़ी में आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है, जहाँ मदन कौशिक, भरत चौधरी, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा और खजान दास ने मंत्री पद की शपथ ली। चूंकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में 2027 में एक साथ चुनाव होने हैं, इसलिए यूपी में भी इसी तर्ज पर जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बिठाते हुए विस्तार तय माना जा रहा है।
संगठन को मजबूती देने पर जोर
भाजपा और संघ का मुख्य उद्देश्य संगठन की संरचना को अधिक धारदार बनाना है। मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए न केवल नए चेहरों को मौका दिया जाएगा, बल्कि उन मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है जिनका रिपोर्ट कार्ड संतोषजनक नहीं रहा है। अगले 48 घंटे यूपी की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
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