Aga (Uttar Pradesh, India)। टीटीजेड (ताज संरक्षित क्षेत्र) में पांच जिले आते हैं। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस और राजस्थान का भरतपुर। टीटीजेड क्षेत्र के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसम्बर, 2019 को एग्रोफोरेस्ट्री व एग्रोफार्मिंग को प्रोत्साहित करने के आदेश पारित किये गये हैं। वन विभाग को यह काम कराना है, लेकिन वह कुछ कर नहं रहा है। निजी भू-धारकों व किसानों द्वारा एग्रोफोरेस्ट्री को अपनाना पर्यावरणीय दृष्टि से अति आवश्यक है। पेड़ काटने के लिये सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति की अनिवार्यता समाप्त हो गई है किन्तु टीटीजेड में पेड़ काटने की अनुमति प्रदान नहीं की जा रही है, जिसके कारण किसान व निजी भू-धारक अपनी निजी भूमि पर पौधारोपण करने से डरते हैं। तरह-तरह की शंकाएं प्रकट करते हैं।
चौधरी उदयभान सिंह ने वन मंत्री को लिखा पत्र
इस समस्या के बारे में उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म लघु मध्यम और निर्यात प्रोत्साहन राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह ने वन मंत्री दारा सिंह चौहान को पत्र लिखा गया है। नेशनल चैम्बर ऑफ इण्डस्ट्रीज एण्ड कॉमर्स, आगरा विधि प्रकोष्ठ के चेयरमैन केसी जैन ने पत्र के बाद चौधरी उदयभान सिंह ने वन मंत्री से अनुरोध किया है कि वे अपने स्तर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिनांक 11.12.2019 की अनुपालना कराएं ताकि टीटीजेड में वृक्षारोपण वृहत स्तर पर हो सके।
एग्रोफोरेस्ट्री व एग्रोफार्मिंग को प्रोत्साहित किया जाए
राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह द्वारा यह भी उल्लेख किया गया कि नेशनल चैम्बर ऑफ इण्डस्ट्रिज एण्ड कॉमर्स आगरा, ने अपने पत्र दिनांक 24.07.2020 में यह उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिट याचिका सिविल सं0 13381/1984 में आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन (ए0डी0एफ0) द्वारा प्रस्तुत आई0ए0 सं0 104097/2018 में दिनांक 11.12.2019 को आदेश पारित किया गया था कि टी0टी0जेड में एग्रोफोरेस्ट्री व एग्रोफार्मिंग को प्रोत्साहित किया जाये।
टी0टी0जेड में वन क्षेत्र मात्र 3.43 प्रतिशत
यह पत्र राज्यमंत्री द्वारा नेशनल चैम्बर ऑफ इण्डस्ट्रिज एण्ड कॉमर्स की पहल पर लिखा गया है, जिसकी ओर से चैम्बर अध्यक्ष राजीव अग्रवाल एवं विधिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के0सी0 जैन ने राज्यमंत्री चै0 उदयभान सिंह से व्यक्तिगत मुलाकात की। उन्हें बताया कि टी0टी0जेड में वन क्षेत्र मात्र 3.43 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय टारगेट 33 प्रतिशत का है। फोरेस्ट सर्वे आॅफ इण्डिया की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 के मुकाबले वर्ष 2019 में वन आवरण आगरा में 9.38 वर्ग किलोमीटर कम हो गया था। इस परिप्रेक्ष्य में जब तक निजी भूमि पर किसान और भू-धारक पूरी तरह से बिना किसी शंका के वृक्षारोपण नहीं करेंगे, तो टी0टी0जैड में हरियाली नहीं बढ़ सकेगी। हरियाली बढ़ाये बिना एअर क्वालिटी में सुधार नहीं हो सकेगा। चैम्बर की ओर से के0सी0 जैन के द्वारा यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2015 व 2018 में लगाये गये उस प्रतिबन्ध को 11.12.2019 के आदेश से समाप्त कर दिया है जिसके अनुसार पेड़ काटने से पहले सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य था। इस वर्षा ऋतु में किसानों द्वारा बड़े स्तर पर फलदार व टिम्बर ट्री लगाये जाने चाहिये जिसके लिये प्रचार-प्रसार किया जाना आवश्यक है।
वन मंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन
राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह ने चैम्बर को यह भी आश्वस्त किया कि वह शीघ्र ही चैम्बर के प्रतिनिधिमण्डल को वनमंत्री से भी मुलाकात करायेंगे ताकि शासन स्तर से आवश्यक आदेश एग्रोफोरेस्ट्री को बढ़ाने के लिए जारी हो सकें।
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