दुर्गा शंकर मिश्र

यूपी के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की कविताएं सुनाकर आगरा को भावुक कर दिया, आगराइट्स को दी ये सीख

Agra, Uttar Pradesh, India. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र साहित्यकार भी हैं। उन्होंने अपने साहित्य होने का परिचय द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी मूर्ति अनावरण समारोह में दिया। उन्होंने बचपन में पढ़ी माहेश्वरी जी की कविताओं को सुनकर आगरा वालों को भावुक कर दिया। उनकी कविताओं को कालजयी बताया। कहा कि वे बच्चों के […]

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जन्‍मदिन विशेष: शहनाई के जादूगर भारत रत्‍न उस्‍ताद बिस्मिल्‍लाह खां

जन्‍मदिन विशेष: शहनाई के जादूगर भारत रत्‍न उस्‍ताद बिस्मिल्‍लाह खां

[ad_1] वाराणसी में आज शहनाई के जादूगर भारत रत्‍न उस्‍ताद बिस्मिल्‍लाह खां को उनकी जयंती पर याद किया जा रहा है। 21 मार्च 1916 को बिहार के डुमरांव में जन्‍‍‍‍मे बिस्मिल्‍लाह खां का इंतकाल 21 अगस्‍त 2006 को वाराणसी हुआ था। खां साहब की कब्र पर गीता के श्‍लोक और कुरान की आयतें गूंजती रहीं। यही […]

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पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार खुशवंत सिंह की पुण्‍यतिथि आज

पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार खुशवंत सिंह की पुण्‍यतिथि आज

[ad_1] प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार और इतिहासकार खुशवंत सिंह की आज पुण्‍यतिथि है। 02 फरवरी 1915 को अखंड भारत के पंजाब में जन्‍मे खुशवंत सिंह की मृत्‍यु 20 मार्च 2014 के दिन दिल्‍ली में हुई।एक ऐसा लेखक जो अपनी सोच में अलग था, दिल की बात जुबां से जब भी निकलती, एक कहानी कह जाती […]

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उर्दू अदब के शायरों में एक अलग स्थान रखते हैं नज़ीर

उर्दू अदब के शायरों में एक अलग स्थान रखते हैं नज़ीर

[ad_1] सदियों की उपेक्षा के बाद जब हिंदी-उर्दू के साहित्य-संसार ने नज़ीर को कवि माना, तब से उनके कलामों को बहुत श‍िद्दत से याद किया जाने लगा। उर्दू अदब में एक से एक बेहतरीन शायर हुए हैं, लेकिन नज़ीर अपना अलग स्थान रखते हैं। नज़ीर को सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल के तौर पर देखा जाता […]

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पुण्‍यतिथि: युवा पीढ़ी पर अपनी गहरी छाप छोड़ते हैं कवि केदारनाथ सिंह

पुण्‍यतिथि: युवा पीढ़ी पर अपनी गहरी छाप छोड़ते हैं कवि केदारनाथ सिंह

[ad_1] प्रमुख आधुनिक हिंदी कवियों एवं लेखकों में से एक कवि केदारनाथ सिंह की आज पुण्‍यतिथि है। 7 जुलाई 1934 को उत्तर प्रदेश के बलिया में जन्‍मे केदार नाथ सिंह की मृत्‍यु 19 मार्च 2018 को नई दिल्‍ली में हुई। केदार नाथ सिंह आज की युवा पीढ़ी पर अपनी गहरी छाप छोड़ते हैं। अपनी पूरी रचनात्मकता […]

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कई सौ साल पुरानी काव्य शैली ताँका, ज‍िसने हाइकू को जन्म द‍िया

कई सौ साल पुरानी काव्य शैली ताँका, ज‍िसने हाइकू को जन्म द‍िया

जापानी काव्य की कई सौ साल पुरानी काव्य शैली को ताँका कहते हैं ज‍िससे हाइकू शैली के कव‍िता लेखन का जन्म हुआ, ताँका -शब्द का अर्थ है लघुगीत। साह‍ित्य‍िक इत‍िहास के अनुसार नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के दौरान इसके विषय धार्मिक या दरबारी हुआ करते थे । हाइकु की संरचना 5+7+5+7+7=31वर्णों की होती है। […]

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आज के ही दिन उर्दू शायर दाग़ देहलवी ने छोड़ दी थी दुनिया

आज के ही दिन उर्दू शायर दाग़ देहलवी ने छोड़ दी थी दुनिया

[ad_1] 25 May 1831 को दिल्‍ली में जन्‍मे दाग़ देहलवी का 17 मार्च 1905 को हैदराबाद में इंतकाल हुआ था। नवाब मिर्जा खाँ ‘दाग़’ , उर्दू के प्रसिद्ध कवि थे। इनके पिता शम्सुद्दीन खाँ नवाब लोहारू के भाई थे। जब दाग़ पाँच-छह वर्ष के थे तभी इनके पिता मर गए। इनकी माता ने बहादुर शाह […]

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पुण्‍यतिथि: प्रसिद्ध साहित्‍यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

पुण्‍यतिथि: प्रसिद्ध साहित्‍यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

15 अप्रैल 1865 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में जन्‍मे हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की आज पुण्‍यतिथि है। ‘हरिऔध’ की मृत्‍यु 16 मार्च 1947 को अपने गृह जनपद आजमगढ़ में ही हुई थी। वे 2 बार हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति रहे और सम्मेलन द्वारा विद्या वाचस्पति की उपाधि से सम्मानित […]

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पुण्‍यतिथि: उर्दू शायरों के बड़े नामों में से एक राही मासूम ऱजा

पुण्‍यतिथि: उर्दू शायरों के बड़े नामों में से एक राही मासूम ऱजा

[ad_1] उर्दू शायरों के बड़े नामों में से एक राही मासूम ऱजा का जन्‍म गाजीपुर जिले के गंगौली गांव में 01 सितंबर 1925 को हुआ था और इंतकाल 15 मार्च 1992 के दिन हुआ।बचपन में ही पोलियो हो जाने के कारण उनकी पढ़ाई कुछ सालों के लिए छूट गयी लेकिन इंटरमीडियट करने के बाद वह […]

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गुलाल गोटा से होली को रंगीन बनाते हैं जयपुर के कलाकार

गुलाल गोटा से होली को रंगीन बनाते हैं जयपुर के कलाकार

[ad_1] जयपुर के कलाकार काफी दिन पहले से होली के पर्व को गुलाल गोटा के जरिये रंगीन बनाने में जुट जाते हैं। ये गुलाल गोटे भारत की विरासत रही गंगा जमुनी तहजीब की निशानी हैं।रंगों के पर्व होली के नजदीक आते ही बाजारों में दुकानें तरह-तरह की पिचकारियों, गुलाल, रंगों से सजी दिखाई देती हैं। […]

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