अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्रों से निकली चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं और गबन का मामला अब एक बड़ी प्रशासनिक और जांच-प्रक्रिया में तब्दील हो चुका है। एसआईटी (SIT) की जांच का दायरा अब केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहकर मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था तक पहुँच गया है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण के बाद मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
जवाबदेही तय करने की तैयारी: शीर्ष पदों पर हो सकते हैं बदलाव
मंदिर की छवि को हुए नुकसान और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा के लिए नई दिल्ली में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में कड़ी जवाबदेही तय करने का निर्णय लिया गया है। चर्चाओं के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों, जिनमें महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण कार्यों से जुड़े प्रमुख सहयोगी गोपाल राव समेत कुछ अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी शामिल हैं, उन्हें पद से मुक्त किया जा सकता है। इसे ट्रस्ट द्वारा एक बड़े सुधारात्मक कदम के रूप में पेश करने की तैयारी है, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि निगरानी में कमी या लापरवाही बरतने वाले किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
एफआईआर और कानूनी शिकंजा
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां अब इस निष्कर्ष पर पहुँच रही हैं कि दानपात्रों की रकम में इतनी बड़ी हेरफेर केवल कुछ कर्मचारियों के दम पर संभव नहीं थी। एसआईटी ने चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव सहित दानराशि की गणना में शामिल अन्य कर्मियों के खिलाफ एफआईआर की पूरी तैयारी कर ली है। पर्याप्त वित्तीय साक्ष्य मिलने पर इन सभी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, दान राशि को बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया में शामिल कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
नियुक्तियों और सुरक्षा व्यवस्था की हो रही समीक्षा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एसआईटी का जांच दायरा अब 22 जनवरी 2024 को हुई रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर परिसर में हुई नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और सुरक्षा प्रोटोकॉल तक विस्तृत हो गया है। वर्तमान में मंदिर परिसर में लगभग 800 कर्मचारी तैनात हैं, जिनमें से 200 कर्मचारी सीधे ट्रस्ट द्वारा नियुक्त किए गए हैं। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन नियुक्तियों का आधार क्या था और जिम्मेदारियां किन मानदंडों पर तय की गई थीं।
विशेष रूप से, सुरक्षा से जुड़े एक ऐसे कर्मचारी का नाम सामने आया है, जो बीते 17 वर्षों से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात है। इस पुराने कर्मी और अन्य लंबे समय से जमे पर्यवेक्षकों की भूमिका, उनकी कार्यप्रणाली और जवाबदेही को एसआईटी पूरी बारीकी से खंगाल रही है।
भविष्य की दिशा: व्यापक सुधार का संकेत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल एक आर्थिक अपराध नहीं रहा, बल्कि यह मंदिर के प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा तंत्र की परीक्षा बन गया है। एसआईटी की आगामी रिपोर्ट तय करेगी कि भविष्य में मंदिर की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कौन से कड़े कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, पूरे देश की निगाहें इस जांच पर टिकी हैं कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में सेंध लगाने वालों को किस प्रकार के कानूनी दंड का सामना करना पड़ता है।
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