मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कैबिनेट बैठक में चयन नियमावली 2024 को मंजूरी दे दी है। इससे यूपी सरकार खुद अपनी पसंद के आईपीएस अफसर को डीजीपी बना सकेगी। अब सरकार को यूपीएससी के ऊपर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गरमाने लगी है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने डीजीपी चयन की नयी नियमावली को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को डीजीपी चयन की नयी नियमावली को दिल्ली बनाम लखनऊ बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सुना है किसी बड़े अधिकारी को स्थायी पद देने और और उसका कार्यकाल 2 साल बढ़ाने की व्यवस्था बनायी जा रही है… सवाल ये है कि व्यवस्था बनानेवाले ख़ुद 2 साल रहेंगे या नहीं। कहीं ये दिल्ली के हाथ से लगाम अपने हाथ में लेने की कोशिश तो नहीं है। दिल्ली बनाम लखनऊ 2.0…”
बताया जा रहा है कि नई चयन नियमावली तहत यूपी सरकार ने अपने स्तर से डीजीपी का चयन करने के स्वतंत्र होगी। इसके लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। समिति में मुख्य सचिव, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से एक सदस्य, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या उनकी तरफ से नामित अधिकारी के अलावा अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव गृह व पूर्व डीजीपी शामिल होंगे।
गौरतलब है कि पिछले तीन सालों से यूपी को पूर्णकालिक डीजीपी नहीं मिल पाया है। मौजूदा समय में प्रशांत कुमार यूपी के कार्यवाहक डीजीपी हैं जोकि अगले साल मई में रिटायर होने वाले हैं। चर्चा है कि प्रशांत कुमार को ही पूर्णकालिक डीजीपी बनाया जा सकता है। कार्यवाहक डीजीपी बनने से पहले प्रशांत कुमार कई सालों तक एडीजी लॉ एंड आर्डर पद पर तैनात थे।
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