दिल्ली ,लखनऊ , सूरत में बड़े बड़े अग्निकांड हुए वावजूद अग्निशमन विभाग ने कोई सबक नही लिया आगरा के तमाम हॉस्पिटल आज भी बिना फायर एनओसी में संचालित हो रहे है आगरा में कई अस्पताल ऐसे हैं जिन पर फायर की एनओसी नही हैं कई अस्पताल रेजीडेंशल में संचालित हो रहे है ऐसा नही की विभाग को जानकरी नही लेकिन विभाग शिकायत या मीडिया को एक दूसरे विभाग को जिम्मेदार बताता है खुद विभाग ने उस पर क्या कार्यवाही की तो उसमे चुप्पी साधते नजर आते हैं अग्नि शमन विभाग नोटिस तो हर साल सेकड़ो भवनों को देते हैं लेकिन उन नोटिस पर क्या कार्यवाही हुई उस पर जबाब देना अग्निशमन विभाग को जानकारी नही नोटिस के माध्यम से कितना राजस्व वसूला कितनो पर कार्यवाही हुई इसका हिसाब नही
इससे साफ यह जाहिर होता हैं अग्निशमन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बिना मानको पर बने भवनों से समझौता कर उसे चलाने का लाइसेंस दे देते है शहर में आज भी नामचीन हॉस्पिटल जैसे गोयल हॉस्पिटल, एपेक्स हॉस्पिटल, पुष्पाजंलि, मधुवन प्लाजा, जैसे तमाम हॉस्पिटल और भवन रोमसन्स की 18 नंबर फैक्टी के सी 1, सी2 गुप्ता ओवरसीज की दो फेक्ट्री में से से एक पर एनओसी हैं एक बिना एनओसी मानको को ताक पर रखकर चल रही हैं यह तो केवल नाम मात्र नाम बताए ।
तमाम जूते के कारखाने घरों में संचालित हो रहे है तमाम शोरूम, कोचिंग, होटलों पर एनओसी नही हैं आगरा शहर के पिछले तीन साल में करीब 2 दर्जन से जयदा आग की बड़ी घटना हुए, वावजूद अग्निशमन विभाग कुंभकर्ण की नींद में सो रहा हैं सूत्रों की माने तो इन बिना मानको वाले भवनों से अग्निशमन विभाग को सुविधा शुल्क पहुचना बताया जा रहा हैं जिसके चलते न खबरों का संज्ञान लेना उचित समझा जाता और न बिना एनओसी वाले संस्थान पर कार्यवाही दिखाई दे रही है ।
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