लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने लद्दाख के अधिकारों और देश के युवाओं के भविष्य को लेकर चल रहे संघर्ष को एक नई दिशा दे दी है। पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने जंतर-मंतर पर 17 दिनों से आमरण अनशन कर रहे प्रख्यात शिक्षाविद सोनम वांगचुक के समर्थन में निर्णायक आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की संवेदनहीनता और मुख्यधारा के मीडिया की चुप्पी के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सोनम वांगचुक के अनशन से प्रधानमंत्री मोदी और संवेदनहीन भाजपा सरकार नहीं पसीजेगी , हम गंगा की निर्मलता के लिए 100 दिनों से ज्यादा तक आमरण अनशन पर बैठे जी.डी. अग्रवाल का हश्र देख चुके हैं जिनकी मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री ने केवल औपचारिकता का ट्वीट ही किया था। उन्होंने कहा कि जब देश का नौजवान सड़कों पर उतरेगा तभी यह संवेदनहीन सत्ता झुकेगी। इस अन्याय के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए संजय सिंह ने घोषणा की है कि आगामी 20 जुलाई को आम आदमी पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई हर जिले में व्यापक प्रदर्शन और आंदोलन के जरिए सोनम वांगचुक के संघर्ष को जन-जन तक पहुंचाएगी।
लद्दाख के प्रहरी और ‘3 ईडियट्स’ के प्रेरणास्रोत सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर मौत से जूझ रहे
संजय सिंह ने कहा कि ‘समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।’ उन्होंने याद दिलाया कि सोनम वांगचुक वही शख्सियत हैं जिनके जीवन पर ‘3 ईडियट्स’ फिल्म बनी और जिन्होंने कमजोर बच्चों की शिक्षा के लिए लद्दाख में क्रांतिकारी स्कूल बनाया। उन्होंने भारतीय सेना के जवानों के लिए -20 डिग्री तापमान में भी सुरक्षा देने वाले विशेष टेंट का आविष्कार किया। आज वही देशभक्त नौजवानों के अधिकारों के लिए 17 दिनों से भूखा बैठा है, उनका वजन घट रहा है और हालत बिगड़ रही है, लेकिन उनका हौसला अटूट है।
93 पेपर लीक, NEET धांधली और अग्निवीर योजना ने बर्बाद किया करोड़ों नौजवानों का भविष्य
संजय सिंह ने सोनम वांगचुक के अनशन को देश के उन करोड़ों युवाओं के भविष्य से जोड़ा जिनका जीवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि देश में अब तक 93 पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे युवाओं का सपना टूट गया है। NEET की परीक्षाओं में हुई धांधली और सेना की स्थायी नौकरी को खत्म कर लाई गई 4 साल की ‘अग्निवीर’ योजना ने युवाओं को अंधकार में धकेल दिया है। सोनम वांगचुक उन्हीं नौजवानों के हक की बुलंद आवाज बनकर जंतर-मंतर पर डटे हैं।
सोनम वांगचुक के अनशन पर ‘गोदी मीडिया’ की चुप्पी और सरकार की संवेदनहीनता लोकतंत्र के लिए घातक
सांसद संजय सिंह ने मुख्यधारा के मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि तथाकथित ‘गोदी मीडिया’ की आत्मा मर चुकी है। सरकार के दबाव में कोई भी नेशनल टीवी चैनल 17 दिन से भूखे बैठे सोनम वांगचुक की एक लाइन की खबर नहीं दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया और सरकार दोनों मोदी जी के गुलाम हो चुके हैं। अगर आज देश का युवा सड़कों पर उतरकर वांगचुक का साथ नहीं देगा, तो यह चुप्पी आने वाली पीढ़ियों के लिए अपराध साबित होगी।
प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल जैसा हश्र न हो जाए, भाजपा के सांसद-विधायक भी अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें
प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए संजय सिंह ने याद दिलाया कि प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल ने गंगा की निर्मलता के लिए 100 दिनों से ज्यादा अनशन किया था, लेकिन मोदी जी का दिल नहीं पसीजा। उनकी मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री ने केवल औपचारिकता का ट्वीट किया। उन्होंने भाजपा के सांसदों और विधायकों से सवाल किया कि क्या उनके बच्चों के पेपर लीक नहीं होते? उन्हें भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोनम वांगचुक की बात सुनने और अपनी ही सरकार पर दबाव बनाने की जरूरत है।
संवेदनहीनता और ट्रोलिंग की राजनीति के खिलाफ एकजुट हुआ विपक्ष
संजय सिंह ने बताया कि सोनम वांगचुक के संघर्ष को विपक्षी दलों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जब आम आदमी पार्टी, जॉन ब्रिटास (CPIM), दीपांकर भट्टाचार्य (CPIML), पुष्पेंद्र सरोज (सपा), उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता समर्थन देने जाते हैं, तो भाजपा के ट्रोल उनका मजाक उड़ाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवेदनशील मुद्दों पर आवाज उठाना नेताओं की जिम्मेदारी है और वे गालियों व आलोचनाओं से डरकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
20 जुलाई को उत्तर प्रदेश के हर जिले में होगा महासंग्राम, सोनम वांगचुक के हक में आवाज बुलंद करेगी ‘आप’
संजय सिंह ने प्रदेश की जनता का आह्वान करते हुए कहा कि मैंने तय किया है कि 20 जुलाई को आम आदमी पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई हर जिले में सोनम वांगचुक के समर्थन में विशाल आंदोलन करेगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह इस अपराध बोध के साथ नहीं जीना चाहते कि जब एक व्यक्ति देश के भविष्य के लिए जान की बाजी लगा रहा था, तब हम खामोश थे। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अस्पताल में भर्ती अनशनकारी बिटिया दानिश और जंतर-मंतर पर बैठे 25 अन्य अनशनकारियों के हक में अपनी आवाज उठाएं।
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