मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में मौलाना खलील-उर-रहमान सज्जाद नोमानी के एक बयान ने भूचाल ला दिया है। मौलाना द्वारा जाट समाज को लेकर दिए गए विवादास्पद दावे ने क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने पर बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में मौलाना ने दावा किया कि पश्चिमी यूपी और हरियाणा के जाटों ने महापंचायत कर यह ऐलान किया है कि वे ‘हिंदू नहीं हैं’ और वे जल्द ही सिख धर्म अपना लेंगे। इस दावे के सामने आते ही जाट समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है और मुजफ्फरनगर से लेकर दिल्ली तक इसकी तीखी आलोचना हो रही है।
जाट महासभा की खुली चेतावनी
बयान के वायरल होते ही जाट महासभा ने मौलाना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासभा के मुजफ्फरनगर जिला अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “मौलाना का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। उन्हें जाट समाज के गौरवशाली इतिहास और उनकी मार्शल परंपराओं की कोई समझ नहीं है।”
बालियान ने दो-टूक कहा कि जाट समाज को उकसाने का परिणाम मौलाना के लिए बुरा हो सकता है। उन्होंने मौलाना को सलाह दी कि वे अविलंब अपने शब्द वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज का कोई व्यक्ति आहत होकर उग्र हुआ, तो इसके लिए मौलाना स्वयं जिम्मेदार होंगे। बालियान ने 2013 के दंगों का संदर्भ देते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्व फिर से क्षेत्र की शांति और भाईचारे को दांव पर लगाना चाहते हैं।
राकेश टिकैत का पलटवार: “यह फूट डालने की साजिश”
किसान नेता राकेश टिकैत ने इस बयान को ‘सरकार से प्रेरित’ और जनता को भटकाने वाला बताया है। टिकैत ने कहा कि इतिहास में जाट समाज के लोग अलग-अलग संप्रदाय में रहे हैं, लेकिन उनकी मूल पहचान और संस्कार हमेशा सनातन से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “धर्म के ठेकेदार शहरों में बयानबाजी करने के बजाय उन क्षेत्रों में जाएं जहां आदिवासियों का वास्तव में धर्मांतरण हो रहा है।” टिकैत ने जोर दिया कि जाट और सिख समुदाय का तालमेल हमेशा से भाईचारे का रहा है, और ऐसे बयान केवल समाज में दरार पैदा करने के कुत्सित प्रयास हैं।
प्रशासन अलर्ट, साइबर सेल की कड़ी निगरानी
बयान के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मुजफ्फरनगर पुलिस के साइबर सेल को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और उस पर आने वाली प्रतिक्रियाओं की चौबीसों घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। भड़काऊ टिप्पणियों को रोकने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है। साथ ही, शांति और सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा जल्द ही दोनों समुदायों के प्रबुद्ध नागरिकों और धर्मगुरुओं की एक ‘शांति समिति’ की आपात बैठक बुलाई जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह को जड़ से खत्म किया जा सके।
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