आगरा। राष्ट्रीयकृत बैंकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर मंगलवार को आगरा में साफ नजर आया। United Forum of Bank Unions के आह्वान पर शहर के सभी सरकारी बैंक बंद रहे। State Bank of India, Canara Bank समेत अन्य बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा, जिससे आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी
हड़ताल के दौरान बैंककर्मियों ने विभिन्न बैंकों के आंचलिक कार्यालयों और शाखाओं के बाहर धरना दिया। केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कर्मचारियों ने पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग को दोहराया। यूनियन नेताओं का कहना है कि लंबे समय से उठ रही इस मांग पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया।
ताले देखकर लौटे ग्राहक
हड़ताल की पूर्व सूचना न मिलने से कई ग्राहक सुबह बैंक पहुंचे, लेकिन शाखाएं बंद मिलने पर उन्हें लौटना पड़ा। बुजुर्गों, पेंशनधारकों और छोटे कारोबारियों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। एटीएम और डिजिटल सेवाएं चालू रहीं, लेकिन शाखाओं से जुड़े काम न होने के कारण विकल्प सीमित रहे।
करोड़ों का कारोबार प्रभावित
बैंकों के बंद रहने से शहर में करोड़ों रुपये के लेन-देन पर असर पड़ा। चेक क्लीयरेंस, नकद भुगतान और ऋण संबंधी कार्य रुकने से बाजार की रफ्तार धीमी पड़ी। औद्योगिक इकाइयों और थोक व्यापार में भी भुगतान अटकने की शिकायतें सामने आईं।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन पदाधिकारियों ने साफ किया कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि यह कदम कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन और बैंकिंग व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है।
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