हिन्दू होना गर्व भी, जिम्मेदारी भी…जागरण नहीं हुआ तो भारत फिर खंडित हो सकता है: सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज

RELIGION/ CULTURE

आगरा। “हिन्दू होना जितना गर्व का विषय है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है। यदि आज का हिन्दू समाज जागरूक नहीं हुआ और राष्ट्र से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ा, तो भारत पुनः खंडित राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ सकता है।” यह विचार पीठाधीश्वर सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने व्यक्त किए। वे सैमरा में आयोजित होने जा रहे विराट हिन्दू सम्मेलन में भाग लेने के लिए आगरा पहुंचे थे।

कमला नगर स्थित समाजसेवी सौरभ गुप्ता के निवास पर मीडिया से संवाद के दौरान महाराज जी का वैदिक मंत्रोच्चारण, पुष्पवर्षा और आरती के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

“जब जिम्मेदारी भूलते हैं, तब जीवन दुखों से भर जाता है”

मीडिया से बातचीत में सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि जब समाज अपनी जिम्मेदारी भूल जाता है, तब केवल राष्ट्र ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी दुखों से भर जाता है। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि हिन्दू समाज की निष्क्रियता और आत्मकेन्द्रित जीवनशैली ने ही भारत को कई बार कमजोर किया और बार-बार खंडन का मार्ग प्रशस्त किया।

उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत भोग, लिप्सा और स्वार्थपूर्ण जीवन ने हमेशा समाज को कमजोर किया है। ऐसे समय में राष्ट्र के प्रति जागरूकता और कर्तव्यबोध का जागरण आवश्यक है।

“यह कार्यक्रम किसी संगठन का नहीं, आम हिन्दू का है”

महाराज जी ने स्पष्ट किया कि विराट हिन्दू सम्मेलन किसी संगठन विशेष का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आम हिन्दू और राष्ट्रवादी समाज का आयोजन है। उन्होंने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व को समझने का अवसर है।

महाराज जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हिन्दू समाज एकजुट होकर चेतना सम्पन्न बने, स्वयं जागे और दूसरों को भी जगाए। उन्होंने कहा कि जब भारत हिन्दुओं के द्वारा पुष्पित, पल्लवित और पोषित होगा, तभी विश्व में शांति और आनंद की सुगंध फैलेगी।

“बांग्लादेश आज, कहीं कल भारत न बन जाए”

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के सवाल पर सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने दो टूक कहा कि आज जो घटनाएं वहां हो रही हैं, वही कभी कंधार, लाहौर और सिंधु में हुआ करती थीं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश उसी राह पर बढ़ रहा है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मानवीय दृष्टि से बांग्लादेश की चिंता जरूरी है, लेकिन उससे अधिक जरूरी है अपने देश की चिंता। जो दृश्य आज वहां दिख रहा है, कहीं कल वही भारत में न दिखाई देने लगे। यह केवल आशंका नहीं, बल्कि इतिहास और वर्तमान की चेतावनी है।

“राष्ट्र सुरक्षित रहेगा, तभी संस्कृति सुरक्षित रहेगी”

राष्ट्र कथा पर बोलते हुए महाराज जी ने कहा कि जैसे घर की छत मजबूत होगी तभी परिवार सुरक्षित रहेगा, वैसे ही राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तो संस्कृति सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा कि श्रीराम और श्रीकृष्ण भारत की आत्मा हैं। राष्ट्र मजबूत रहेगा तो राम कथा और कृष्ण कथा का प्रवाह चलता रहेगा, लेकिन यदि राष्ट्र कमजोर हुआ तो जहां आज कथाएं हो रही हैं, वहां भी बंद हो जाएंगी।

उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और भारत के कई हिस्सों का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र कथा आज सबसे अधिक आवश्यकता बन चुकी है।

“संविधान मनुष्य के लिए है, मनुष्य संविधान के लिए नहीं”

महाराज जी ने कहा कि हिन्दुत्व कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति है। भारत का स्वरूप स्वाभाविक रूप से हिन्दू राष्ट्र का है।

उन्होंने स्पष्ट कहा “धर्म मनुष्य के लिए बना है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं। उसी प्रकार संविधान मनुष्य के लिए बना है, मनुष्य संविधान के लिए नहीं।”

संविधान संशोधन को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर उन्होंने कहा कि अब तक संविधान में सैकड़ों संशोधन हो चुके हैं। समाज की सुरक्षा, शिक्षा, चिकित्सा और जीवन पद्धति को बेहतर बनाने के लिए परिवर्तन आवश्यक है।

“युवा शिक्षार्थी नहीं, विद्यार्थी बनें”

युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि केवल एकेडमिक क्वालिफिकेशन पर्याप्त नहीं है, संस्कारों की शिक्षा भी अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा केवल शिक्षार्थी की नहीं, बल्कि विद्यार्थी की रही है। शिक्षा और विद्या में अंतर है। परीक्षा में असफलता से उत्पन्न अवसाद को लेकर उन्होंने युवाओं से अपील की कि कोई भी प्रयास अंतिम नहीं होता। असफलता से घबराएं नहीं, शॉर्टकट न अपनाएं और निरंतर प्रयास करते रहें।

इनकी रही उपस्थिति

महाराज जी के आगमन पर प्रमुख रूप से विजय सामा, शशि रंजन गुप्ता, शोभा गुप्ता, सौरभ गुप्ता, अर्पणा गुप्ता, सृष्टि गुप्ता, शौर्य गुप्ता, पुनीत अग्रवाल, सारिका अग्रवाल, पंकज एवं शिप्रा मित्तल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति और सनातन चेतना का संदेश स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

Dr. Bhanu Pratap Singh