स्मार्ट टीवी और मोबाइल ने बदली दर्शकों की पसंद; 3 साल में आधे रह जाएंगे पेड डीटीएच सब्सक्राइबर!

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नई दिल्ली। क्या भारतीय टीवी इंडस्ट्री अपने सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुकी है? भले ही अभी इसे अंतिम निष्कर्ष न माना जाए, लेकिन टीवी सेक्टर से जुड़े हालिया आंकड़े और उद्योग की गतिविधियां भविष्य के प्रति गंभीर संकेत दे रही हैं। The Economic Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते तीन वर्षों में देश के 50 से अधिक टीवी चैनलों ने अपने प्रसारण लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब दर्शक तेजी से कनेक्टेड टीवी, मोबाइल और OTT प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरनेट से जुड़े कनेक्टेड टीवी पर अब केबल या DTH के बजाय OTT ऐप्स और ऑनलाइन वीडियो कंटेंट की खपत बढ़ रही है। इसका सीधा असर टीवी चैनलों की विज्ञापन आय पर पड़ा है, जो लगातार घट रही है।

बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने लौटाए लाइसेंस

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो स्टार (JioStar), Zee Entertainment Enterprises, इनाडु टीवी (Eenadu Television), NDTV और ABP Network जैसे प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स ने कई टीवी लाइसेंस वापस किए हैं।

इसके अलावा Culver Max Entertainment—जो Sony Pictures Networks India के नाम से संचालित होती है—ने 26 डाउनलिंकिंग परमिशन सरेंडर की हैं।

जियो स्टार ने Colors Odia, MTV Beats, VH1 और Comedy Central जैसे चैनलों के लाइसेंस लौटाए हैं। कंपनी का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह आंतरिक कारोबारी रणनीति के तहत लिया गया। वहीं जी एंटरटेनमेंट ने Zee Sea चैनल को बंद कर दिया है।

लागत बढ़ी, कमाई घटी

हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल दंगल (Dangal) चलाने वाली Enter10 Media ने भी Dangal HD और Dangal Oriya के लाइसेंस वापस किए हैं। ABP Network ने ABP News HD का संचालन बंद कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि चैनल संचालन की बढ़ती लागत और अपेक्षाकृत कम कमाई के चलते ऐसे फैसले लेने पड़े।

इसी तरह NDTV ने अपने प्रस्तावित गुजराती न्यूज़ चैनल NDTV Gujarati का लाइसेंस भी सरेंडर कर दिया।

कितने चैनल अभी सक्रिय हैं

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक, भारत में फिलहाल 916 टीवी चैनल डाउनलिंकिंग के लिए पंजीकृत हैं। इनमें 572 फ्री-टू-एयर और 334 पेड चैनल शामिल हैं। इसके अलावा, 10 ऐसे चैनल भी हैं जिनका अपलिंक भारत से होता है, लेकिन प्रसारण केवल विदेशों में किया जाता है।

OTT और फ्री डिश की ओर दर्शकों का रुझान

टीवी इंडस्ट्री अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक दबाव, दर्शकों की बदलती पसंद और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की आक्रामक मौजूदगी के कारण चैनल्स अपनी रणनीति बदल रहे हैं। अमीर और शहरी दर्शक तेजी से OTT प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहे हैं, जबकि खर्च कम रखने वाले दर्शक DD Free Dish को प्राथमिकता दे रहे हैं।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में पेड DTH सब्सक्राइबर की संख्या 7.2 करोड़ थी, जो 2023-24 में घटकर 6.2 करोड़ रह गई। मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 5.1 करोड़ से भी नीचे जाने का अनुमान है।

विज्ञापन और नियमों की दोहरी मार

वैश्विक विज्ञापन एवं मार्केटिंग कंपनी WPP का अनुमान है कि 2025 में टीवी विज्ञापन से होने वाली कमाई 1.5 प्रतिशत घटकर 477.4 अरब रुपये रह सकती है।

उद्योग संगठनों का कहना है कि लाइसेंसिंग, कंटेंट और प्राइसिंग से जुड़े कड़े सरकारी नियमों ने ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर की चुनौतियां और बढ़ा दी हैं, जबकि OTT प्लेटफॉर्म्स को अपेक्षाकृत कम नियमों का पालन करना पड़ता है।

इन तमाम संकेतों के बीच सवाल यह है कि क्या टीवी इंडस्ट्री खुद को नए डिजिटल युग के अनुरूप ढाल पाएगी, या फिर यह गिरावट आगे और गहरी होती जाएगी। फिलहाल, उद्योग के सामने आत्ममंथन और रणनीतिक बदलाव की सख्त जरूरत साफ दिखाई दे रही है।

साभार मीडिया रिपोर्ट्स

Dr. Bhanu Pratap Singh