आगरा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और प्रयोगात्मक विज्ञान के समन्वय से देश की जटिल चुनौतियों के समाधान के नए मार्ग खुलेंगे। अनुसंधान, शिक्षा और उद्योग—तीनों क्षेत्रों में एआई की भूमिका निर्णायक होने जा रही है। यह संदेश दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान उभरकर सामने आया, जहां भविष्य उन्मुख विज्ञान पर गहन मंथन हुआ।
संगोष्ठी “रसायन विज्ञान अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उभरती भूमिका” में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि पारंपरिक रासायनिक विज्ञान के साथ एआई के एकीकरण से जटिल अनुसंधान समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है। इससे शिक्षा जगत और उद्योग दोनों में नवाचार को नई दिशा मिलेगी।
रसायन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में आईआईएसईआर भोपाल के डॉ. साई फणी कुमार वंगाला तथा आईआईटी इंदौर की डॉ. रूपांजली प्रसाद ने तकनीकी व्याख्यान दिए। उन्होंने एआई आधारित मॉडलिंग, डेटा विश्लेषण और प्रक्रिया अनुकूलन के माध्यम से रसायन विज्ञान में हो रहे अत्याधुनिक शोध कार्यों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने कहा कि एआई और रसायन विज्ञान का समन्वय नवोन्मेषी, मूल्य-आधारित और अनुप्रयोग-उन्मुख अनुसंधान को बढ़ावा देगा। उन्होंने छात्रों से मूलभूत रासायनिक ज्ञान के साथ गणनात्मक और विश्लेषणात्मक कौशल विकसित करने का आह्वान किया।
संगोष्ठी की शुरुआत में विभागाध्यक्ष प्रो. रोहित श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया और एआई की बढ़ती भूमिका पर परिचयात्मक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में रजिस्ट्रार प्रो. संजीव स्वामी, कोषाध्यक्ष सुश्री स्नेह बिजलानी सहित अनेक शिक्षाविद् और शोधकर्ता उपस्थित रहे। संगोष्ठी का समन्वय प्रो. अनीता लखानी ने किया, जबकि डॉ. नाज़िया सिद्दीकी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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