अखंड रामायण के स्वर में विदा हुआ अंग्रेजी नववर्ष, भगवा चेतना से गूंजा आगरा
सनातन परंपरा के साथ नववर्ष का आयोजन
Live Story Time, Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
राष्ट्रीय भगवा दल के बैनर तले अंग्रेजी नववर्ष 2026 के उपलक्ष्य में मरघरटी वाली रोड स्थित पीपल वाले पेड़ के पास हनुमान मंदिर पर 31 दिसंबर से 1 जनवरी तक अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया।
राम नाम से आध्यात्मिक हुआ वातावरण
अखंड रामायण पाठ के दौरान मंदिर परिसर राम नाम की ध्वनि से गूंज उठा। पाठ के समापन के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम ने भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
इतिहास के पुनर्मार्जन का संकल्प
राष्ट्रीय भगवा दल के अध्यक्ष अमोल दीक्षित ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन आगे भी निरंतर किए जाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज द्वारा स्वतःस्फूर्त रूप से इतिहास का पुनर्मार्जन किया जा रहा है और भारत अपने मूल सनातनी स्वरूप की ओर लौट रहा है।
अंग्रेजी नववर्ष को सांस्कृतिक विदाई
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने
अंग्रेजी नववर्ष को भावनात्मक और सांस्कृतिक विदाई दी और नए वर्ष में धर्म, राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस अवसर पर अध्यक्ष अमोल दीक्षित के साथ वंश शर्मा, सूरज प्रजापति, विशाल कुशवाह, निखिल, मयंक, तरुण, सक्षम, जीतू, अनिल, आयुष, योगेश श्रीवास्तव, सत्यभान, सुशांत आदि कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
संपादकीय
अखंड रामायण और नववर्ष: आत्मा की ओर लौटता भारत
अंग्रेजी कैलेंडर का एक पन्ना पलटता है, मगर भारत में समय केवल तारीख़ नहीं बदलता—वह चेतना बदलता है। आगरा में अखंड रामायण के स्वरों के बीच अंग्रेजी नववर्ष को विदाई देना महज़ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संकेत है कि समाज अब शोर नहीं, संस्कार चुन रहा है। डीजे की आवाज़ से नहीं, राम नाम की ध्वनि से नववर्ष का स्वागत—यही भारतीय तरीका है, पुराना भी और भविष्य का भी।
आज जब दुनिया तेज़ी से भाग रही है, तब सनातन परंपरा ठहरकर आत्मचिंतन करना सिखाती है। अखंड रामायण का पाठ हमें याद दिलाता है कि संस्कृति कोई संग्रहालय की वस्तु नहीं, वह रोज़ जी जाने वाली प्रक्रिया है। यह आयोजन दिखाता है कि धर्म मंच की घोषणा नहीं, जीवन की दिनचर्या है—शांत, संयमित और सामूहिक।
इतिहास के पुनर्मार्जन की बात आज नारे की तरह नहीं, आचरण की तरह सामने आ रही है। जब समाज स्वतः आगे बढ़कर अपने मूल की ओर लौटता है, तब किसी आदेश की ज़रूरत नहीं पड़ती। ऐसे आयोजन बताते हैं कि भारत अपने सनातनी स्वरूप की ओर लौट रहा है—न किसी को ठुकराकर, न किसी पर थोपकर; बस अपने स्वभाव को अपनाकर।
अंग्रेजी नववर्ष को विदाई देना अतीत से लड़ना नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों को थामना है। यह स्वीकार करना है कि आधुनिकता तभी सार्थक है जब वह परंपरा से जुड़ी हो। अखंड रामायण का यह आयोजन उसी सेतु का निर्माण करता है—जहाँ कल की सीख, आज की समझ और कल का संकल्प एक साथ खड़े दिखाई देते हैं।
नववर्ष का असली अर्थ संकल्प है। अगर वह संकल्प राम के आदर्शों से जुड़ा हो—सत्य, मर्यादा और करुणा से—तो वर्ष अपने आप शुभ हो जाता है। यही संदेश है इस आयोजन का, और यही भारत की दिशा भी।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
- श्री रामलीला महोत्सव 2026: हनुमान जी के पराक्रम से धू-धू कर जली स्वर्ण लंका, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा रामलीला मैदान - October 15, 2026
- आगरा में दशहरा शोभायात्रा से पहले घमासान: समिति गठन को लेकर भाजपा और सपा समर्थित गुट आमने-सामने, डीसीपी कार्यालय पहुंचा विवाद - October 15, 2026
- आगरा में साइबर ठगी के दो बड़े मामले: डिजिटल लॉक तोड़ने के बाद खाते से निकाले रुपये, तो एपीके लिंक से 9.80 लाख की चपत - October 15, 2026