आगरा के बरौली अहीर में एक परिवार ने समाज के सामने मिसाल पेश की है। यहां 67 वर्षीय कुसुमलता ने अपनी विधवा बहू के लिए स्वयं वर तलाशा और उसे बेटी की तरह धूमधाम से शादी के मंडप तक पहुंचाया। कुसुमलता ने न सिर्फ मां की भूमिका निभाई बल्कि अपने हाथों से बहू का कन्यादान कर सभी रस्में निभाईं। विवाह के बाद बहू को नए ससुराल विदा करते हुए उन्होंने समाज को एक नया संदेश दिया।
दो साल पहले बेटे का हुआ था निधन
कुसुमलता के बेटे का 4 जनवरी 2023 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। पति की मौत 32 साल पहले ही हो चुकी थी, ऐसे में जवान बेटे को खोने का दर्द उनके लिए असहनीय था। बहू की पीड़ा को समझते हुए उन्होंने उसके भविष्य की चिंता की और उसके लिए योग्य वर की तलाश शुरू की। मंगलवार को उन्होंने अपनी पुत्रवधु का विवाह गांव श्यामो निवासी विशाल जैन पुत्र स्व. ललित जैन के साथ श्यामों स्थित हनुमान मंदिर में संपन्न कराया।
विधवा बहू के लिए मां का फर्ज निभाया
कुसुमलता ने बताया कि एक विधवा जीवन किन कठिनाइयों से गुजरती है, वे इस दर्द से भलीभांति परिचित हैं। अक्सर बीमार रहने के कारण उन्हें अपनी मृत्यु के बाद बहू के अकेले पड़ जाने की चिंता सताने लगी। इसी वजह से उन्होंने समाज की परंपराओं को किनारे रखते हुए बहू की दूसरी शादी करवाने का निर्णय लिया।
बेटी की तरह की विदाई, गृहस्थी का सामान भी दिया
कुसुमलता ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने भी सोचा कि समाज क्या कहेगा, लेकिन बहू की खुशियों को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने सभी रूढ़ियों को तोड़ने का फैसला किया। शादी के बाद बहू को बेटी की तरह विदा किया और उसकी नई गृहस्थी के लिए पूरा सामान भी प्रदान किया।
शादी समारोह में गांव के कई लोग मौजूद रहे, जिनमें समाजसेवी विजय कुमार लोधी, विवेक जैन, उमेश जैन, जीवा राम जैन और राकेश जैन शामिल थे। सभी ने नवविवाहित दंपती को आशीर्वाद दिया।
यह परिवार सामाजिक सोच में बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।
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