आगरा: ब्रजभूमि के अजेय योद्धा और ‘जाटों के अफलातून’ कहे जाने वाले महाराजा सूरजमल का 319वां जन्मोत्सव शुक्रवार को किरावली के शांति देवी महाविद्यालय में गौरवपूर्ण तरीके से मनाया गया। अखिल भारतीय जाट महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जहाँ महाराजा की वीरता का गुणगान हुआ, वहीं ब्रज के महान योद्धाओं की उपेक्षा को लेकर गहरा आक्रोश भी व्यक्त किया गया।
लोहागढ़ के अजेय निर्माता को किया नमन
महासभा के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने कहा कि महाराजा सूरजमल एक ऐसे कुशल रणनीतिकार थे, जिन्होंने लोहागढ़ जैसा अभेद्य किला बनाया जिसे अंग्रेज भी कभी जीत नहीं सके। वक्ताओं ने याद दिलाया कि कैसे 18वीं शताब्दी में महाराजा ने मुगलों और विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ दीवार बनकर भारतीय संस्कृति की रक्षा की थी।
प्रशासन को अल्टीमेटम: “प्रतिमा नहीं तो घेराव”
महासभा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आगरा में ब्रज के नायकों के स्मृति-चिह्न गायब हैं। युवा और महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की कि आगरा किले के सामने महाराजा सूरजमल की भव्य प्रतिमा सरकारी खर्च पर स्थापित की जाए। साथ ही, बीर गोकला, राजा महेंद्र प्रताप और राजाराम जाट जैसे नायकों के नाम पर मार्गों और पार्कों का नामकरण हो। महासभा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन मांगों को अनसुना किया गया, तो वे आगरा किले का घेराव करेंगे।
इस अवसर पर फौरन सिंह इंडोलिया, वीरेंद्र सिंह छोंकर, डॉ. रुपेश चौधरी और श्रीमती वंदना सिंह सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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