आगरा में ‘स्तनपान कॉर्नर’ का कमाल: शिशु स्वास्थ्य के प्रति बदल रही है दादी-नानी की सोच, खत्म हो रही हैं पुरानी भ्रांतियां

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आगरा। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और वैज्ञानिक सलाह के दम पर आगरा में शिशु स्वास्थ्य की स्थिति सशक्त हो रही है। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित ‘स्तनपान कॉर्नर’ अब न केवल माताओं के लिए, बल्कि दादी-नानी जैसी घर की बुजुर्ग महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गए हैं। यहां दी जा रही काउंसलिंग से पुरानी भ्रांतियां दूर हो रही हैं और परिवारों को यह समझ आ रहा है कि छह माह तक शिशु के लिए मां का दूध ही संपूर्ण आहार है।

भ्रांतियों को दूर कर रही काउंसलिंग

नगला धनी निवासी शिवांगी का अनुभव इसका जीता-जागता उदाहरण है। पांच माह के बच्चे को गर्मी के कारण पानी पिलाने से जब बच्चा बीमार पड़ा, तो जीवनीमंडी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने न केवल मां को, बल्कि सास और परिवार के सदस्यों को बुलाकर समझाया। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघना शर्मा बताती हैं कि ऐसे मामले ओपीडी में आम हैं। इसलिए प्रसव कक्ष के पास ही विशेष कॉर्नर बनाए गए हैं, जहां मार्च 2026 से अब तक 575 से अधिक माताओं और उनके परिजनों को स्तनपान का सही तरीका और महत्व समझाया जा चुका है।

​74 स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रभावी पहल

उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति के अनुसार, जनपद में 74 स्वास्थ्य इकाइयों पर स्तनपान कॉर्नर स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशु केवल स्तनपान के जरिए स्वस्थ रहे और उसका सुचारू विकास हो। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि मां का दूध न केवल पोषण का स्रोत है, बल्कि यह शिशु को दस्त, संक्रमण और निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियों से भी बचाता है।

क्या कहती हैं चिकित्सा विशेषज्ञ?

जिला महिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. खुशबू केसरवानी के अनुसार, “मां का दूध शिशु के लिए अमृत है। जन्म के बाद गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाना अनिवार्य है। मां के दूध में 80% से अधिक पानी होता है, जो अत्यधिक गर्मी में भी बच्चे की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त है। इसलिए छह माह से छोटे बच्चे को पानी, घुट्टी, शहद या गाय-भैंस का दूध देने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं होती।”

लाभार्थियों का अनुभव

नगला छिददा की कोमल और मोतीलाल नेहरू रोड की पूनम जैसी माताएं अब अन्य महिलाओं के लिए उदाहरण बन रही हैं। कोमल ने बताया कि चिकित्सक की सलाह मानकर उन्होंने बच्चे को सिर्फ स्तनपान कराया, जिससे बिना पानी के भी उनका बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। वहीं पूनम का कहना है कि उन्होंने छह माह तक सिर्फ स्तनपान के नियम का पालन किया, जिसका परिणाम है कि उनका आठ माह का बच्चा आज बिल्कुल हष्ट-पुष्ट है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल अब आगरा के समुदाय में एक स्वस्थ क्रांति लेकर आ रही है।

Dr. Bhanu Pratap Singh