Hathras (Uttar Pradesh, India) । गर्मी बढ़ते ही मच्छरों की तादाद अचानक से बढ्ने लगती है जो कई प्रकार की संक्रामक बीमारियाँ घर पर लाती है। इन संक्रामक बीमारियों में से एक है मलेरिया जिसका समय रहते इलाज नहीं किया गया तो यह जानलेवा भी हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुये लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। लेकिन अच्छी बात यह हैं कि मलेरिया अब महामारी नहीं है। वर्ष 2020 की कैंपेन थीम “Zero malaria starts with me” है।
ये बोले अधिकारी
जिला मलेरिया अधिकारी एम जौहरी बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष कार्यशाला आयोजित की जाती है, लेकिन इस बार कोरोना महामारी की वजह से हम लोग कोई भी जागरूकता कार्यक्रम नहीं कर पा रहे हैं।सहायक मलेरिया अधिकारी एसपी गौतम ने बताया मच्छर गंदगी और कई दिनों तक जमा पानी में ही पनपते हैं। इसलिए घर के आस-पास सफाई रखें। घर में पीने के पानी को खुला न छोड़ें। उसे हमेशा किसी चीज से ढककर रखें। खाने वाली चीजों को भी हमेशा ठक कर रखें।ज्यादा तेज सिर दर्द, ठंड लगना, बार-बार प्यास लगना, एक समय पर बुखार का आना और उतरना इसके लक्षण हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट:
वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2019 के मुख्य तथ्य, वैश्विक स्थिति
• रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में विश्व भर में मलेरिया के 228 मिलियन मामले सामने आए जिसमे मलेरिया के सर्वाधिक मामले अफ्रीकी क्षेत्र (213 मिलियन मामले अथवा 93 प्रतिशत) में थे। इसके पश्चात् क्रमशः दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र (3.4 प्रतिशत) और पूर्वी मध्यसागरीय क्षेत्र (2.1 प्रतिशत) का स्थान है। सर्वाधिक मामले नाइजीरियामें सामने आए।
• रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीकी क्षेत्र में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम सबसे ज्यादा प्रचलित मलेरिया परजीवी है।
• रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर वर्ष 2018 में मलेरिया से अनुमानित 405000 मौतें हुई। वर्ष 2018 में कुल मलेरिया से होने वाली मौतों में से 94 प्रतिशत मौतें अफ्रीकी क्षेत्र में हुई जिसमे नाइजीरिया में मलेरिया से सर्वाधिक मौतें हुईं।
• विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2019 अल्जीरिया एवं अर्जेंटीना और वर्ष 2018 में पराग्वे तथा उज्बेकिस्तान को मलेरिया मुक्त घोषित किया गया।
• वर्ष 2018 में वैश्विक स्तर पर मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन में अनुमानित कुल 2.7 बिलियन डॉलर निवेश किए गए।
• दुनियाभर में मलेरिया के कुल मामलों में से 70 फीसदी 11 देशों में देशो में देखे जाते हैं। इन देशों में डेमोक्रेटिक पब्लिक ऑफ द कॉन्गो, घाना, भारत, माली, मौजेम्बिक, नाइजर, नाइजेरिया, युगांडा, बुर्किना फाजो, कैमरून और युनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया है।
• मलेरिया से होने वाली कुल मौतों का 71 फीसदी इन्हीं 11 देशों में होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 2018 में मलेरिया पीड़ित 11 लाख गर्भवती महिलाएं 8,72,000 बच्चों को ही जन्म दे पाईं। इन बच्चों में 16 फीसदी ऐसे थे जितना वजन सामान्य से काफी कम था।
भारत की स्थिति
• भारत में 2017 और 2018 में मलेरिया के 28 फीसदी मामलों में कमी आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 2018 में भारत में मलेरिया के 26 लाख और युगांडा में 15 लाख मामले सामने आए हैं। जो पिछले सालों के मुकाबले कम हैं।
• इसी के साथ भारत मलेरिया प्रभावित दुनिया के शीर्ष चार देशों की सूची से बाहर हो गया है। लेकिन मलेरिया से सबसे अधिक प्रभावित दुनिया के 11 देशों में भारत एक-मात्र गैर-अफ्रीकी देश के रूप में मौजूद है।
• भारत में मलेरिया को पूरी तरह से खत्म करने के लिए 2016 में ‘मलेरिया उन्मूलन’ अभियान की शुरुआत की गई थी। जो कारगर साबित हो रहा है है। मलेरिया प्रभावित 11 देशों की सूची में भारत एक मात्र ऐसा देश है जहां इस बीमारी को खत्म करने के लिए फंडिंग बढ़ाई गई है।
• भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां मलेरिया को हराने के लिए अधिकतर सरकारी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया है जबकि अन्य 10 देशों में विदेशी फंडिंग से मलेरिया से लड़ने की जंग जारी है।
• भारत में मलेरिया सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। मलेरिया के अधिकांश मामलों की सूचना देश के पूर्वी और मध्य भागों से प्राप्त हुयी है और उन राज्यों से प्राप्त हुयी है जहां वन, पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्र हैं। इन राज्यों में उड़ीसा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा कुछ उत्तर-पूर्वी राज्य जैसे कि त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम शामिल हैं। हालांकि जलवायु परिवर्तन से मलेरिया के मामलों में तेजी आई है।
भारत में मुख्यतः दो प्रकार का मलेरिया
• प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम एवं प्लाज्मोडियम वाईवेक्स। ये मच्छर जब मलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को काटता है तब उसके खून में मौजूद प्लाज्मोडियम को अपने शरीर में खींच लेता है। लगभग आठ से दस दिन तक ये मच्छर मलेरिया फैलाने में सक्षम हो जाता है। यह परजीवी लार के साथ उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है। जिससे स्वास्थ्य व्यक्ति भी मलेरिया से ग्रसित हो जाता है।
आगे की राह
• भारत में मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को 2027 तक प्राप्त करने एवं 2030 तक मलेरिया को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आवश्यक है कि केंद्र और राज्य सरकार दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए विश्व के आवंटन को बढ़ाएं। इसके साथ ही मलेरिया की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा वैक्सीन इत्यादि के विकास पर शोध में निवेश करें। इसके अलावा मलेरिया रोग को ट्रेस करने के लिए अधिक से अधिक लोगों को निगरानी में लाए जा। मलेरिया के वाहक में प्रतिरोधकता के संदर्भ में नई मलेरिया दवाओं की खोज सुनिश्चित की जाए इसके साथ ही मलेरिया इलाज को सर्व सुलभ बनाया जाए।
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