सफेद रंग शांति और प्यार का प्रतीक होता है। यह बात विश्व का हर वर्ग का व्यक्ति जानता है| 14 मार्च को सफेद दिवस है, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं| यह दिवस महिलाओं द्वारा अपने पुरुष मित्रों को वैलेंटाइन डे पर दिए गए उपहार जैसे चॉकलेट, टेडी बीयर, रोज आदि के बदले रिटर्न गिफ्ट जेने के रूप में मानाया जाता है। वैलेंटाइन डे के ठीक 1 महीने बाद यानी 14 मार्च को चॉकलेट, फूल, ज्वेलरी आदि देकर पुरुष अपनी भावनाओं को अपनी पत्नी, महिला मित्र, महिला सहकर्मी के प्रति प्रेम दर्शाता है।
इसकी शुरुआत जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन के कुछ हिस्सों में हुई थी| कई अन्य एशियाई देशों में भी यह दिवस मनाया जाता है। जापान देश में पुरुषों के लिए यह एक बहुत आत्मीयता वाला दिन होता है। प्यार के दिवस वैलेंटाइन डे पर महिला व पुरुष एक दूसरे को चॉकलेट, टेडी बेयर, रोज आदि देकर अपने प्यार का इजहार करते हैं। इसी तरीके से सफेद दिवस पर महिला और पुरुष चॉकलेट, फूल, ज्वेलरी आदि रिटर्न गिफ्ट के रूप में एक दूसरे के प्रति प्यार की भावनाओं को प्रदर्शित करता है| यह किसी के लिए एक आदर्श रिश्तों को मजबूत करने का दिन है जिससे आपने वैलेंटाइन डे पर एक उपहार प्राप्त किया था और जिसकी आप उम्मीद नहीं कर रहे थे। इस प्रेम के दिन को आभार व सबंध को प्रगाढ़ करने के लिए सफेद दिन के रूप में मनाया जाता है।
1978 में जापानी नेशनल कन्फेक्शन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने वैलेंटाइन डे के लिए सफेद दिवस के विचार को बढ़ावा देने में मदद की थी| जापान में यह परंपरा थी कि केवल महिलाएं वैलेंटाइन डे पर चॉकलेट का उपहार देती हैं और इसीलिए उन्होंने फैसला किया कि एक ऐसा दिन होने की जरूरत है जहां पुरुष इसे वापस करके अपनी प्रशंसा दिखाएं।
सफेद दिवस बनाने की एक बड़ी रोचक कथा है| एक कन्फेक्शनरी की छोटी सी दुकान के मालिक जिंगो यीशु मोरा एक महिला पत्रिका पढ़ रहे थे। उसमें एक चिट्ठी ने उनका ध्यान खींचा। महिला ने लिखा था यह वास्तव में उचित नहीं है कि वैलेंटाइन डे पर पुरुष को महिलाओं से चॉकलेट मिलती है लेकिन वह एहसान वापस नहीं करते हैं, वह हमें कुछ क्यों नहीं देते चाहे एक रूमाल, कैंडी यहां तक कि मार्शमॉल्लो। यीशुमोरा ने तर्क दिया,- अगर महिलाएं अपने वेलेंटाइन डे उपहार के बदले में मार्शमॉल्लो प्राप्त करने में खुश होंगी, तो पुरुषों के लिए एक विशेष दिन का आविष्कार क्यों नहीं किया जाए, ताकि वे अपना आभार व्यक्त कर सकें| इसके बाद जिंगो यीशु मोरा ने रिटर्न गिफ् के रूप में एक नई मिठाई तैयार की, जिसमें चॉकलेट के अंदर मार्शमॉल्लो पेस्ट बनाया गया। इस तरह का एक परंपरा का जन्म हुआ। 1980 के दशक तक वाइट डे पूरे जापान में फैल गया था और उपहार के रूप में वाइट चॉकलेट और अन्य टांगीबल्स को शामिल करना शुरू कर दिया।
–राजीव गुप्ता जनस्नेही
लोकस्वर, आगरा
फोन नंबर 98370 97850
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