आगरा। ताजनगरी के थाना सदर क्षेत्र स्थित ज्योति नगर–बैंक कॉलोनी में दशकों पुराना सामाजिक सौहार्द रातों-रात एक दीवार के पीछे दफन हो गया। यहाँ हिंदू और मुस्लिम आबादी के बीच एक दीवार खड़ी कर सार्वजनिक रास्ते को बंद कर दिया गया है। इस निर्माण ने न केवल भूगोल बदला है, बल्कि वर्षों से साथ रह रहे परिवारों के बीच एक ‘धार्मिक बॉर्डर’ खड़ा कर दिया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है।
रात 1:30 बजे हुआ निर्माण, उठे सवाल
विवाद की सबसे बड़ी वजह निर्माण का समय है। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि यदि यह प्रक्रिया कानूनी थी, तो प्रशासन ने रात के डेढ़ बजे चोरी-छिपे दीवार क्यों बनवाई? उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पास रास्ते के वैध दस्तावेज हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें सुनने को तैयार नहीं है। वहीं, हिंदू पक्ष का तर्क है कि असुरक्षा और भय के माहौल के कारण शांति बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।
कांग्रेस का आरोप: गंगा-जमुनी तहजीब पर प्रहार
मामला तूल पकड़ते ही राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह ने मुस्लिम समाज के साथ मिलकर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि आगरा जैसे प्रेम के शहर में धर्म के आधार पर दीवार खड़ी करना यहाँ की संस्कृति पर हमला है। उन्होंने प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए तुरंत दीवार हटाने की मांग की है।
सवालों के घेरे में प्रशासन
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि क्या किसी सार्वजनिक रास्ते को बिना दोनों पक्षों की सहमति या अदालती आदेश के इस तरह बंद किया जा सकता है? फिलहाल, यह दीवार इलाके में चर्चा और विवाद का केंद्र बनी हुई है और लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
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