नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ‘छात्रों की गूंज’ नाम से एक व्यापक देशव्यापी अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षाओं में धांधली, शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण, अत्यधिक फीस का बोझ और गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता जैसे मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाना है। राहुल गांधी ने छात्रों से सीधे संवाद का वादा करते हुए कहा है कि यह उनकी शिक्षा, भविष्य और संघर्ष की लड़ाई है, जिसे वे संसद से लेकर सड़क तक लड़ेंगे।
शिक्षा का ‘बाज़ारीकरण’ और बजट में कटौती पर तीखे सवाल
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को एक मुनाफे वाले बाज़ार में तब्दील कर दिया गया है, जिसके कारण केवल संपन्न वर्ग ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम रह गया है। उन्होंने सरकार पर यह आरोप लगाया कि उसने अपनी जिम्मेदारी उन निजी कंपनियों के हाथों में सौंप दी है जो शिक्षा के व्यापक उद्देश्यों के बजाय केवल मुनाफे के लिए कार्य कर रही हैं।
राहुल गांधी ने आंकड़ों के माध्यम से शिक्षा बजट की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में भारत का शिक्षा बजट लगातार कम हुआ है और वर्तमान में यह कुल बजट का केवल 2.4% हिस्सा ही है। उन्होंने एक चौंकाने वाला तथ्य साझा करते हुए बताया कि भारत के कुल वार्षिक केंद्रीय शिक्षा बजट के बराबर राशि (लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये) तो केवल 22 लाख NEET अभ्यर्थी अपनी तैयारी और परीक्षा पर खर्च कर देते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि देश में लगभग हर घंटे एक सरकारी स्कूल बंद हो रहा है, क्योंकि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को खत्म कर प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बेरोजगारी का संकट और छात्रों पर दबाव
राहुल गांधी ने वर्तमान रोजगार परिदृश्य पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में प्रवेश करने वाले हर 1,000 छात्रों में से केवल 12 ही स्नातक होने के बाद एक स्थायी नौकरी हासिल कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि जब एक ही प्राधिकरण (एजेंसी) हर परीक्षा, हर सीट और हर परीक्षा परिणाम को नियंत्रित करने लगे और किसी के प्रति जवाबदेह न हो, तो यह व्यवस्था छात्रों को सिर्फ विफल ही नहीं करती, बल्कि उनके सपनों को पूरी तरह कुचल देती है।
उन्होंने पिछले 10 वर्षों में हुए 90 से अधिक प्रश्नपत्र (पेपर) लीक की घटनाओं को युवाओं की वर्षों की मेहनत और उम्मीदों का विनाश बताया। उन्होंने वर्ष 2023 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उस वर्ष 66,955 युवाओं ने आत्महत्या की। राहुल गांधी के अनुसार, यह उस दबावपूर्ण व्यवस्था की भारी कीमत है जिसमें न तो युवाओं के लिए कोई राहत का रास्ता है और न ही सरकार में कोई जवाबदेही।
पाठ्यक्रम में बदलाव और शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप
अभियान के दौरान राहुल गांधी ने देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ती राजनीतिक नियुक्तियों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों, यूजीसी सदस्यों और आईसीएचआर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अकादमिक योग्यता के बजाय आरएसएस (RSS) से संबंध को आधार बनाया जा रहा है। इससे भारत के विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता और स्वायत्तता कमजोर हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाठ्यक्रम का उपयोग शिक्षा के विस्तार के बजाय एक विशिष्ट विचारधारा को थोपने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, इतिहास को मिटाया जा रहा है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को कमजोर किया जा रहा है, जिसकी कीमत अंततः छात्रों को अपनी शिक्षा की गुणवत्ता खोकर चुकानी पड़ रही है।
राहुल गांधी ने छात्रों से अपील की कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें, अपनी बात रखें और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करें।
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